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नौकरी छोड़ सफल किसान बनी वल्लरी चंद्राकर

Last Updated: October 14, 2019 (06:31 IST)

खेती-किसानी यूं तो पुरुषों का काम माना जाता है लेकिन बिना महिलाओं के सहयोग से कृषि कार्य पूरा नहीं होता। महिलाएं खेती में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। इसी कड़ी में हम आपको एक ऐसी महिला किसान के बारे में बता रहे जिन्होंने इंजीनियरिंग नौकरी छोड़कर खेती का काम सम्भाला है।

छत्तीसगढ़ की वल्लरी चंद्राकर ने खेती करने के लिए अपनी अच्छी सैलरी वाली इंजीनियरिंग नौकरी छोड़ दी। वल्लरी कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में एमटेक करने के बाद ने दुर्गा कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में नौकरी कर रही थीं लेकिन उन्हें नौकरी में संतुष्टि नहीं मिल रही थी। कुछ अपना करने की ललक उन्हें खेती की ओर खिंच लाई जिसके चलते वो रायपुर में नौकरी छोड़कर अपने गांव लौट आई। वल्लरी का मानना है कि खेती से ज्यादा कोई भी नौकरी महत्वपूर्ण नहीं हो सकती है। हालांकि खेती के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है लेकिव जो संतुष्टि किसी को खेती करने से मिलती है वह कहीं और नहीं मिल सकती है। वल्लरी का कहना है कि बाजार में नई तकनीक के साथ-साथ अब कोई व्यवसाय करना पहले जितना मुश्किल काम नहीं है।

वल्लरी ने खेती करने का काम वर्ष 2016 में शुरू किया। वे बताती हैं कि जब मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और खेती शुरू की तो कई लोगों ने मुझे एक पढ़ी लिखी पागल कहा। मेरे परिवार में तीन पीढ़ियों में किसी ने भी खेती नहीं किया था। मेरे इस निर्णय से कई लोग मुझे नाराज भी हुए। वल्लरी ने कहा कि मुझे शुरू में किसानों, बाजारों और विक्रेताओं से निपटने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। हालांकि उनके पिता, जोकि मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर में इंजीनियर हैं, ने वल्लरी का साथ दिया। उन्होंने एक फार्महाउस बनाने के लिए जमीन खरीदी थी। वल्लरी ने अवसर देखा और खेती के लिए उस भूमि का उपयोग करने का निर्णय लिया।

वल्लरी 27 एकड़ के फार्म पर बड़े पैमाने पर खेती करने का काम करती है। उसके फार्म में ज्यादातर सब्जियां उगाई जा रही हैं। ये सब्जियां पूरे भारत के कई शहरों जैसे इंदौर, नागपुर, बेंगलुरु और दिल्ली में बेची जाती हैं। वल्लरी अपने खेत पर हरी मिर्च, करेला और खीरा जैसी सब्जियां उगाती हैं। उनकी उगाई सब्जियों की प्रसिद्धि विदेशों तक पहुंच गई है। इनकी सब्जियां दुबई और इजराइल में भी जाती है।

खेती का गुण कहां से सीखा पूछे जाने पर वल्लरी ने बताया कि मैंने इंटरनेट से खेती की कई नई तकनीकें सीखी जिसको मैं अपने खेत में प्रयोग भी करती हूं। उन्होंने बताया कि मैंने कई स्थानीय लोगों को रोजगार भी दे रखा है। मैं स्थानीय भाषा का इस्तेमाल करके ग्रामीणों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद स्थापित करती हूं। वह जमीनी स्तर पर काम कर रहे किसानों के लिए नई कृषि तकनीकों पर कार्यशालाएं भी आयोजित करवाती रहती हैं ताकी छोटे किसानों को भी इसका लाभ मिलता रहे।

ग्राहक वल्लरी की सब्जियों के गुणों से काफी प्रभावित होते हैं। वल्लरी के खेत से हो रहे उत्पादन के लिए बाजार का विस्तार तेजी से हो रहा है। खेती के अलावा वह 40 लड़कियों को अंग्रेजी और कम्प्यूटर साइंस पढ़ाती हैं।
कवह 5 बजे तक अपना काम पूरा करती हैं और फिर गांव में जाती हैं। वहां पर 40 लड़कियों को अंग्रेजी और कम्प्यूटर साइंस पढ़ाती हैं। उनके इस काम को देखकर कई लोग प्रेरित हो रहे हैं। 


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