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इजरायल तकनीक से खेती कर 1 करोड़ वार्षिक कमाता है यह किसान

Last Updated: June 08, 2019 (00:11 IST)

अगर आपसे यह कहा जाय कि भारत का कोई साधारण किसान अपने गांव में इजरायली तकनीक से खेती कर 1 करोड़ प्रतिवर्ष की कमाई कर रहा है तो शायद आप विश्वास नहीं करेंगे। लेकिन यह सच है। इजरायल की तर्ज पर राजस्थान के एक किसान ने खेती शुरू की है जिसका सालाना टर्नओवर एक करोड़ रूपया है।

जयपुर जिले के गुड़ा कुमावतान ग्राम निवासी खेमाराम चौधरी ने तकनीकी और ज्ञान का ऐसा तालमेल बैठाया है कि वे हजारों किसानों के लिए आदर्श बन गये हैं। खेमाराम खेती से प्रतिवर्ष लाखों रूपये कमाते हैं। खेमाराम ने इजरायल की तर्ज पर चार वर्ष पहले अपने पैतृक जमीन पर पॉली हाउस लगाकर खेती करने की शुरुआत की थी। पॉली हाउस से मिली सफलता को देखते हुए कई किसानों ने इनके पदचिन्हों पर चलते हुए पॉली हाउस लगवाया। इनकी देखादेखी आसपास के इलाकों में लगभग 200 पॉली हाउस बन गये हैं। लोग अब इस क्षेत्र को मिनी इजरायल के नाम से जानते हैं।

पॉली हाउस का विचार कैसे आया पूछे जाने पर खेमाराम चौधरी ने बताया कि मुझे एक बार सरकार की तरफ से इजरायल जाने का मौका मिला। वहां की कृषि की तकनीक को देखकर मैं अवाक रह गया। तब मैंने भी प्रण लिया कि उन तकनीकों का प्रयोग कर मैं भी खेती करूंगा। उन्होंने बताया कि वे चार हजार वर्गमीटर में पहला पॉली हाउस सब्सिडी की मदद से लगाया। एक पॉली हाउस लगाने में 33 लाख का खर्चा आया। जिसमे नौ लाख मैंने बैंक से लोन लेकर दिया था, बाकी सरकार द्वारा सब्सिडी मिल गयी थी। इस पॉली हाउस में वे पहली बार डेढ़ लाख की लागत से खीरा बोये,  जिसमें चार महीने में ही 12 लाख रुपए की खीरा बिक्री हुई। खीरा से मुझे बहुत लाभ मिला और मैंने बैंक का कर्ज उतार दिया। वे बताते हैं कि इतनी जल्दी मै बैंक का कर्ज चुका पाऊंगा ऐसा मैंने सोचा नहीं था।

आज खेमाराम के पास खुद के सात पॉली हाउस, दो तालाब, चार हजार वर्ग मीटर में फैन पैड है और 40 किलोवॉट का सोलर पैनल है। पुराने दिनों को याद करते हुए वे बताते हैं कि आज से 15 वर्ष पहले उनके पिताजी कर्ज में डूबे थे। ज्यादा पढ़ाई न कर पाने की वजह से परिवार के जीविकोपार्जन के लिए खेती करना ही शेष रह गया था, लेकिन खेती से परिवार का वर्ष भर का खर्चा निकालना ही मुश्किल था। हर समय खेती में घाटा होता था, लेकिन जबसे इजरायल से वापस आया और अपनी खेती में नये तौर-तरीकों को अपनाया हूं, तबसे मुझे खेती में जबरजस्त फायदा मिल रहा है। आज तीन हेक्टयर जमीन से ही सलाना एक करोड़ का टर्नओवर हो जाता है। 

12 लाख के खीर बेचने के बाद आपको कैसा महसूस हुआ पूछे जाने पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि इससे मेरा आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया। खेमाराम ने बताया कि मैंने मुनाफे को देखते हुए सात पॉली हाउस खुद लगाये और अपने भाइयों को भी पॉली हाउस लगवाए।  

फैन पैड (वातानुकूलित) का मतलब समझाते हुए उन्होंने कहा कि इस इसमें पूरे वर्ष तक फसल लिया जा सकता है। हालांकि इसके लगाने की लागत बहुत ज्यादा है इसलिए सभी किसान इसे नहीं लगा पाते हैं। उन्होंने बताया कि मैं पूरे वर्ष इसमें खरबूजा और खीरे की फसल ही लेता हूं। इसमे लागत ज्यादा तो आती है लेकिन लाभ भी चार गुना होता है।

फैन पैड के कार्यविधि को बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें एक ओर 23 पंखे लगें हैं दूसरी ओर फव्वारे से पानी चलता रहता है। गर्मी में जब तापमान ज्यादा रहता है तो सोलर से ये पंखे चलते हैं। इन पंखों से यह फायदा होता है कि फसलों को जरूरत के हिसाब से वातावरण मिलता है, जिससे पैदावार बहुत अच्छी होती है।

मल्च पद्धति से फसलों में रोग नहीं लगते हैं और खरपतवार से भी बचाव हो जाता है। तरबूज, ककड़ी, टिंडे और फूलों की खेती में अच्छा मुनाफा है। सरकार इसमे अच्छी सब्सिडी देती है, एक बार लागत लगाने के बाद इससे अच्छी उपज ली जा सकती है।

खेमाराम ने अपनी आधी हेक्टेयर जमीन में दो तालाब बनाए हैं, जिसमें बरसात का पानी संरक्षित करके सिंचाई की जाती है। खेमाराम की देखादेखी यहां के ज्यादातर किसान इन्हीं की तर्ज पर पानी का संरक्षण कर रहे हैं।

गांव में बिजली की समस्या होने के कारण हर समय बिजली नहीं रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए खेमाराम ने अपने खेत में 40 वाट का सोलर पैनल लगवाया है। अपना अनुभव साझा करते हुए वे बताते हैं कि अगर किसी किसान को अपनी आमदनी बढ़ानी है तो उसे जागरूक होना ही पड़ेगा। खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी रखनी पड़ेगी, थोड़ा रिस्क लेना पड़ेगा, तभी किसान अपनी आमदनी को कई गुना कर सकता है। सोलर पैनल के फायदे के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सोलर पैनल लगाने से फसलों की समय से सिंचाई हो जाती है। फैन पैड भी इसी की मदद से चलते हैं। सोलर पैनल से मुझे हमेशा बिजली मिल रही है।

राजस्थान के इस मिनी इजरायल की चर्चा देश विदेश तक है। खेती के इस बेहतरीन मॉडल को देखने दूरदराज किसान हर दिन आते रहते हैं। खेमाराम ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज इस बात की मुझे बहुत खुशी है कि मेरी देखादेखी ही सही पर किसानों में जागरूकता आई है। यहां के किसानों ने खेती के तरीकों में बदलाव लाना शुरू किया है। इजरायल माडल की शुरुआत राजस्थान में मैंने की थी आज ये संख्या सैकड़ों में पहुंच गयी है, किसान लगातार इसी ढंग से खेती करने की कोशिश में लगे हैं।

खेमाराम के इजरायल तकनीक ने कई किसानों की जिंदगी को बदल कर रख दिया है। फसल क्रांति खेमाराम के स्वर्णिम भविष्य की कामना करता है। 


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