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सागौन ने बनाया करोड़पति

Last Updated: October 27, 2018 (05:46 IST)

खेती अगर सोच समझ कर बाजार मांग के अनुसार किया जाए तो निश्चित तौर पर फायदा होता ही है। यही सोच प्रगतिशील किसान सतनाम ने किया है। सतनाम अपने एक बीघा खेत को 15 साल के लिए सागौन के 500 पौधों के नाम कर दिया और उनकी मन लगाकर देखभाल करने लगे। उनकी मेहनत रंग लाने लगी। जिसके परिणाम स्वरूप आज वे सभी पौधे प्रौढ़ हो चुके हैं। उनके खेत में खड़े एक पेड़ की न्यूनतम कीमत 20 हजार रुपये आंकी गई है। इस तरह सतनाम ने एक करोड़ रुपये का इंतजाम कर अपने परिवार का भविष्य सुदृढ़ कर लिया है। सतनाम की यह युक्ति अन्य किसानों के लिए प्रेरणादाई है।

डबरा, मध्यप्रदेश के गंगाबाग गांव के निवासी सरदार सतनाम सिंह एक छोटे किसान हैं। उन्होंने 15 वर्ष पहले एक बीघा के खेत में सागौन के 600 पौधे रोपे थे। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले शासन-प्रशासन की मदद लेना चाही लेकिन कोई सहायता नहीं मिली। इसके बावजूद भी सतनाम पीछे नहीं हटे और इन पौधों की परवरिश करने की ठान ली। उनके खेत में आज के समय में सागौन के 500 पेड़ खड़े हैं। सतनाम इन्हें थोड़ा और परिपक्व हो जाने देना चाहते हैं।  वर्तमान में एक पेड़ की कीमत करीब 20 हजार रुपये मिलेगी। थोड़ा और विकसित हो जाने पर कीमत और भी बढ़ जाएगी।

सतनाम सिंह ने बताया कि 15 साल पहले एक बीघा के खेत में करीब 600 पौधे रोपे। इसमें तब करीब 70 हजार रुपए का खर्च आया। जानकारों ने तब उन्हें बताया था कि 15 से 20 साल बाद एक पेड़ की कीमत 15 से 20 हजार रुपए होगी। इस तरह 15 साल की मेहनत के बाद सतनाम एक बीघे की बदौलत करोड़पति बनने जा रहे हैं।

सतनाम ने बताया कि क्षेत्र में ऐसे कई किसान हैं जो केवल गेहूं और धान की खेती पर निर्भर हैं। सूखा पड़ने पर सभी के सामने आर्थिक संकट छा जाता है। ऐसी स्थिति में यदि किसान के पास एक अच्छी धनराशि सुरक्षित हो तभी वे सूखे से निपट सकते हैं। इसी बातों को मद्देमजर रखते हुए मैंने सागौन लगाने का निश्चय किया। मैं अब गांव-गांव जाकर किसानों को सागौन के पेड़ लगाने के लिए जागरूक कर रहा हूं।

सतनाम ने बताया कि मैंने वर्ष 2003 में 40 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से सागौन के 600 पौधे खरीदे थे। पौधे को रोपने के लिए मैंने खेत में गड्ढे करवाए। इसमें करीब 70 हजार रुपये तक का खर्च आया। पौधे कम से कम दो मीटर की दूरी पर लगाए जाने थे, लेकिन उस वक्त ध्यान नहीं दिया और आसपास ही पेड़ लगा दिए। 600 में से 100 पौधे कमजोर होकर खराब हो गए थे। लेकिन बचे हुए 500 पौधे अब पेड़ बनकर स्थायी आय का जरिया बन गए हैं। उन्होंने बताया कि एक पेड़ की उम्र लगभग 50 वर्ष होती है, इस दौरान वह बढ़ता ही रहता है। इस तरह प्रत्येक पांच साल बाद एक पेड़ से न्यूनतम 20 हजार रुपये प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपने इस निर्णय से संतुष्ट हूं। अब सूखा पड़े या बाढ़ आये मुझे अब कोई गम नहीं होगा। अब यही सागौन हमारे जीविका सा साधन बनेंगे। सतनाम अपने क्षेत्र के किसानों के लिए नजीर बने हुए है।


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