सुनीता पंवार ने शुरू की नई तकनीक से किचन गार्डनिंग

देश में लगातार कम होती कृषि भूमि और अत्यधिक कृषि रसायनों के इस्तेमाल से खाद्यान्न प्रतिदिन ज़हर बनता जा रहा है। जिससे मानव शरीर को भी नुकसान पहुँच रहा है। इन सब परेशानियों से निपटारे के लिए एक बेहतर उदहारण पेश कर रही है सुनीता पंवार जो एक गृहणी है। उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ में रहने वाली सुनीता पंवार वैसे ग्रामीण युवती हैं, लेकिन शादी के बाद उनका ज्यादातर जीवन अलग-अलग राज्यों के शहरों में बीता। सुनीता पंवार के पति मेरठ स्थित एक सरकारी कृषि अनुसन्धान कार्यालय में कार्यरत हैं जिसके कारण उनके पति की अलग-अलग राज्यों में पोस्टिंग की वजह से सुनीता को भी उनके साथ जाना पड़ा। उनका पूरा परिवार कभी उत्तरी पूर्वी राज्यों तो कभी उत्तर भारत के राज्यों में रहा।

अब सुनीता अपने पति के साथ मेरठ में रह रही हैं। सुनीता के सभी बच्चे बाहर रहते हैं। सुनीता के घर के बाहर कुछ खाली जगह पड़ी हुई थी। इसी जगह को उन्होंने किचन गार्डनिंग के लिए इस्तेमाल किया। सुनीता को अच्छी नौकरियों के लिए कई ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने अपने परिवार और बच्चों की परवरिश के लिए नौकरी नहीं की और गृहणी बनकर अपने परिवार का ख्याल रखना मंजूर किया।

चूंकि बचपन से ही बागवानी के प्रति सुनीता की रूचि रखती थी इसलिए उन्होंने किचन गार्डनिंग करने का फैसला लिया। उन्होंने लगभग 800 स्क्वेयर फीट भूमि में किचन गार्डनिंग करना शुरू किया। जिसमें उनका साथ उनके पति ने भी दिया। सुनीता ने खाली पड़ी उस जगह में 15X10 फीट की छोटी-छोटी क्यारियां सुनियोजित तरीके से बनाई जिसमें उन्होंने सब्जियों के साथ जरूरत के अनुसार आम, केला और पपीते आदि फलों के पौधे लगा रखे हैं। वे सब्जियों के लिए नर्सरी स्वयं ही तैयार करती हैं। किचन गार्डनिंग से वे पूरे वर्ष अलग-अलग मौसम के अनुसार सब्जियां प्राप्त करती हैं। सुनीता कहती हैं की उनको सब्जी और फल लेने के लिए बाजार नही जाना पड़ता है। उनका कहना है कि बाजार में ज्यादातर सब्जियां रसायनयुक्त होती हैं इसलिए हमें अपने घर पर ही जैविक और रसायनमुक्त सब्जियां मिल जाती हैं।

आज के समय में जो महिलाएं घर में रहती हैं उनके पास काफी समय होता है। ऐसे में वो किचन गार्डनिंग करके अपने परिवार के लिए पूरे साल सब्जियां उगा सकती हैं, जिससे उन्हें स्वस्थ सब्जियां मिलती हैं और धन की भी बचत होती है। किचन गार्डनिंग से सुनीता आलू, प्याज, लहसुन, हल्दी, मटर, बांकला, चना, पालक, बथुआ, ब्रोकली, गोभी जैसी सब्जियों के साथ विभिन्न प्रकार के फल भी उगा रही हैं। वे कहती हैं कि यदि कोई छोटा किसान भी इस तरीके से खेती करके अच्छी उपज और आय ले सकता हैं। सुनीता बताती हैं कि उनको अब यह सब करना बहुत अच्छा लगता है और वो दूसरी महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित करेगी।

फसल क्रांति से बातचीत करते हुए उन्होंने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि मैं महिलाओं यह कहना चाहूंगी कि वे घरेलू कामकाज से निवृत्त होकर खाली समय में किचन गार्डनिंग पर ध्यान दें ताकि उन्हें घर पर ही अच्छी सब्जी व फल मिल सके। 

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