Fasal Krati

मटर की खेती से लाखों कमाते हैं सुशील

Last Updated: April 22, 2019 (08:16 IST)

खेती को अगर योजनाबद्ध तरिके से किया जाय तो खेती से भी काफी लाभ कमाया जा सकता है। खेती से होने वाले लाभ को देखते हुए कई लोगो ने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी और खेती करने लगे।  उत्तर प्रदेश के ब्लॉक मरहना जिला मिर्ज़ापुर के गाँव बहुती के एक मामूली किसान सुशील कुमार बिंद ने भी खेती में कमाल किया है। सुशील के पास खेती के लिए लगभग एक हेक्टेयर भूमि है जिसमें वे सब्जी  की उन्नत खेती करके खूब पैसा कमा रहे हैं। सुशील कहते हैं कि सब्जी की खेती करने से पहले मैं अपने परिवार की आवश्यकता को पूरा करने में असमर्थ था। मेरे जीवन में परिवर्तन तब आया जब मैंने वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में किसान मेले में भाग लिया और सब्जी वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की। बातचीत के दौरान मुझे पता चला कि यूपी के पूर्वी हिस्सों में प्रचलित चावल-गेहूं की फसल प्रणाली में सब्जी मटर की शुरुआती किस्में बहुत अच्छी तरह से मिलती हैं।

सुशील ने कहा कि मैंने मेले से आने के बाद सब्जी की खेती करने की ठानी और भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की देखरेख में सब्जी की खेती शुरू कर दिया। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने मुझसे कहा कि वे अपनी पूरे खेत में मटर की खेती करें, मैं सहमत हो गया। मैंने सबसे पहले उन्होंने अपनी जमीन की जांच की और खेत की गहरी जुताई की। मैंने अनावश्यक खरपतवार और कीटों को नष्ट करने के लिए जैविक उर्वरक (गोबर खाद) का प्रयोग किया और अपनी भूमि की सिंचाई की। भूमि की तैयारी के बाद मैंने काशी उदय और काशी नंदिनी किस्म की बुवाई की। पौधे निकलने के बाद मैंने उनकी देखभाल शुरू कर दी और सभी खरपतवारों को नष्ट कर दिया। एक महीने के बाद, फूल खिलना शुरू हो गया और फलने फूलने लगे।

सुशील बताते है कि दिसंबर के महीने में पीपोड्स को चुनना शुरू किया और 35-40 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बाजार में बेच दिया। दिसंबर के महीने में, उन्होंने लगभग 1200 किलोग्राम मटर की फली की बिक्री से 45,000 रूपये कमाया।

जनवरी के महीने में, फसल का उत्पादन बहुत अधिक था और फली की चार पिकिंग के माध्यम से, उन्होंने लगभग 3500 किलोग्राम ताजा मटर की फलियां बेची। बाजार में मटर की अधिकता होने के कारण भाव कम मिले, फिर भी मैंने  एकत्र 58,000 रुपये कमाए। फरवरी के महीने में,12,000 रुपये मिले। उसके बाद मैंने फसल को बीज उत्पादन के लिए छोड़ दिया। बीज के रूप में मैंने लगभग 2500 किलोग्राम बीज एकत्र किया। मैंने बीज की बिक्री से और 15,000 रुपये कमाए।

सुशील बताते हैं कि मटर की खेती से वह लाखों रूपया कमा चुके हैं। वे बताते हैं कि मैं अगर किसी नौकरी में होता तो इतने कम समय में इतना रूपया न कमाया होता। सुशील कहते हैं कि मैं अब मटर की खेती पर ही ध्यान दूंगा।

सुशील, खेती की अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से कृषि वैज्ञानिकों के संपर्क में रहते हैं।

इसके साथ ही वह अन्य किसानों को भी सब्जी की खेती करने के लिए प्रेरित करते हैं।


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