नौकरी छोड़ शुरू की खेती अब कमा रहे लाखों

कहते हैं जब कोई इंसान अपनी मंजिल पाने के लिए ठान लेता है, तो फिर चाहे लाखों मुसीबत उसके सामने क्यूं ना आए, वो कभी पीछे कदम नहीं हटाता। शायद तभी उसको अपनी मंजिल हासिल होती है। ऐसी ही कहानी है उत्तर प्रदेश के रहने वाले दो जुड़वाँ भाईयों की जिन्होंने अच्छी खासी नौकरी छोड़कर खेती शुरू कर दी। आज वो खेती के बदौलत ही लाखों रुपए कमा रहे हैं।

दरअसल उत्तर प्रदेश के फरूर्खाबाद जिले के किसान भाई हिमांशु गंगवार और सुधांशु गंगवार ने अपनी 20 एकड़ की खेती को अपना स्टार्टअप बनाकर एक मिसाल पेश की है। बीटेक की पढ़ाई करने के बाद यूपी के फर्रुखाबाद डिस्ट्रिक्ट के रहने वाले किसान हिमांशु गंगवार और उनके भाई अब प्राकृतिक खेती के दम पर अपना स्टार्ट अप शुरू कर सलाना 14 से 15 लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। कभी 2500 रुपए की जॉब करने वाले इन भाइयों की कंपनी का टर्न ओवर आज लाखों में है।

हिमांशु गंगवार ने 1993 में नागपुर के आरईसी कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उसके बाद 1994-96 तक लखनऊ के सार्वजनिक उद्यमिता विभाग में 2500 रुपए सैलरी पर 3 साल तक असिस्टेंट को ऑर्डिनेटर की नौकरी किया। फिर तीन साल बाद 1996 में उन्होंने उस जॉब को छोड़ दिया और साहिबाबाद के पेंटागन स्क्रू एंड फास्टर लिमिटेड कंपनी में ज्वाइन कर लिया। उस टाइम तनख्वाह कम थी। वे इस नौकरी से संतुष्ट नहीं थे इसलिए 1998 में नौकरी छोड़कर अपने गांव चले गए और खेती करने का निर्णय किया। उनके इस निर्णय से उनकी माताजी सख्त नाराज हो गईं, लेकिन अपनी धुन के आगे उन्होंने किसी की नहीं सुनी और एक विदेशी लेखक की किताब पढ़कर खेती का काम शुरू किया।

हिमांशु गंगवार ने बताया कि काफी संघर्षों के बाद हमने इस काम को शुरू तो किया लेकिन पहले प्रयास में काफी नुकसान हुआ। हमनें बिना हार माने फिर भी प्रयास जारी रखा और वर्ष 2011 में दूसरे प्रयास में शून्‍य लागत प्राकृतिक कृषि पद्धति के जन्‍मदाता पद्मश्री सुभाष पालेकर को फॉलो करके खेती की। इससे एक साल में ही मुनाफा लाखों में पहुंच गया। अब 20 एकड़ में करीब 12 लाख रूपये सालाना तक कमाई पहुंच गई है।

शादी में भी आयी अड़चने :

हिमांशु गंगवार जब नौकरी छोड़कर खेती करने लगे तो उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी दौरान उनकी शादी में भी रुकावट आने लगी। हिमांशु बताते हैं कि जब कोई सुनता कि मैं खेती कर रहा हूं तो कोई शादी के लिए नहीं तैयार नहीं होता था। ये हम दोनों भाईयों के साथ हुआ। मेरी शादी 35 वर्ष की अवस्‍था में हुई। अब हमारे फादर इन लॉ को हम पर गर्व होता है। हमने खेती के साथ-साथ उसके बिजनेस में भी अपना हाथ बटांते हैं। इसके अलावा हम गन्‍ने की एक ही फसल में मूंग और मसूर उगा करके मुनाफे को डबल करते रहते हैं। इसमें मेरे साथ मेरा भाई सुधांशु गंगवार, माताजी, पत्‍नी और ससुराल पक्ष के लोग तक संभालते हैं। अब हमारा परिवार अच्छे से खुशहालीपूर्ण रहता है।

ऐसे बदली तक़दीर:

हिमांशु गंगवार खेती में पहले ही काफी नुकसान झेल चुके थे। ऐसे में हिमांशु वर्ष 2011 में दिल्ली में आयोजित एक मेले में प्राकृतिक कृषि पद्धति के जन्मदाता सुभाष पालेकर से उनकी मुलाकात हुई। सुभाष पालेकर ने उन्हें शून्‍य लागत प्राकृतिक कृषि पद्धति के बारे में बताया और मैंने उन्हें फॉलो करके खेती करना शुरू कर दिया। इससे एक साल में ही मुनाफा लाखों में पहुंच गया। अब 20 एकड़ में करीब 12 लाख रुपए सालाना तक कमाई पहुंच गई है। मेरी फैमिली और आस-पड़ोस के लोग भी मेरी देखा-देखी खेती करने लगे है। मेरा जुड़वा भाई भी मेरे साथ खेती करता है। आज कृषि कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर ये दोनों भाई अच्छा मुनाफा ले रहे हैं। हिमांशु गंगवार अब विदेशी किसानों को भी ट्रेनिंग देते हैं। वो आज कृषि क्षेत्र का एक जाना माना नाम बन चुके हैं।

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