सब्जियों की उन्नत खेती कर लाखो रुपए कमा रहे बिहार के रामसेवक सिंह

कहते हैं, इंसान अपने तजुर्बे से सीखता है और उसे अपने जीवन में अपनाता है। इंसान अपने जीवन के तजुर्बे से ही सीखकर कोई अच्छा मुकाम हासिल करता है। ऐसा ही कुछ तजुर्बा रहा है बिहार के रामसेवक का जो आज एक उन्नत किसान बन चुके हैं। राज्य के मुख्यमंत्री नितिश कुमार भी रामसेवक के खेतों का भ्रमण कर चुके है। 65 साल की उम्र में लोग जब आराम करने की सोचते हैं तो उस उम्र में रामसेवक पूरी तरह से खेती में सक्रिय हैं। रामसेवक बिहार के गया जिले के केशापि गाँव के रहने वाले है। उनका एक संयुक्त परिवार है। रामसेवक पांच एकड़ भूमि में खेती का काम करते हैं।

चूँकि रामसेवक का एक संयुक्त परिवार है ऐसे में उस पांच एकड़ भूमि से पूरे परिवार का खर्च चलना बड़ा मुश्किल था क्योंकि वे पारम्परिक तरीके से खेती कर रहे थे। उससे उनको ज्यादा कमाई नहीं हो रही थी। इसी को ध्यान में रखकर रामसेवक ने अपने जवानी काल में यानी 1985 में ट्रक चलना शुरू किया। ट्रक ड्राइवर का काम करने के दौरान उन्होंने कई राज्यों का भ्रमण किया। पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में खेती को वैज्ञानिक तरीके से जब उन्होंने देखा तो इसका उनके ऊपर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने पांच साल ट्रक चलाने के बाद 1990 में ट्रक चलाना छोड़ दिया और अपने गाँव वापस लौट गए। उन्होंने फिर से खेती की ओर रुख करा और अपने परिवार वालों को अपने निर्णय से अवगत कराया। जिससे उनका परिवार सहमत हो गया और खेती के नए तरीके से खेती करने के लिए तैयार हो गया।

रामसेवक ने सीधे खेती शुरू करने से पहले विशेषज्ञों की राय लेनी जरूरी समझी। उन्होंने जान लिया था कि उन्नत तरीके से खेती के लिए नई विधियों का सहारा लेना होगा और इसके लिए ट्रेनिंग बेहद जरूरी है। इस कार्य में उन्होंने अपने जिले के कृषि विभाग का सहयोग लिया। विभागीय अधिकारियों ने भी उन्हें बढ़-चढ़कर सहयोग किया। उनकी आवश्यकताओं देखते हुए उन्हें, पूसा स्थित कृषि संस्थान में कृषि प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने खेती करना शुरू किया। अब किसान रामसेवक लिए खेती से बढ़कर कुछ नहीं था।

रामसेवक ने बताया कि उन्होंने प्रशिक्षण से वापस लौटने के बाद अपने 5 एकड़ खेत में आम के पौधे लगा दिए। इस बार उन्होंने जैविक खेती पर ध्यान देना शुरू किया। वो खेती में जैविक खाद और ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल करना शुरू किया। अब रामसेवक के परेशानी के दिन दूर होने लगे राम सेवक के खेत में फसल का उत्पादन बढ़ने लगा। रामसेवक बताते है कि उन्होंने गोबर गैस प्लांट भी स्थापित कर रखा है इसी के साथ वर्मीकम्पोस्ट खाद भी तैयार करते है। अब उनके परिवार में कोई भी परेशानी नहीं है और पूरा संयुक्त परिवार इकट्ठे ही रहता है। सभी एक साथ खेती के काम में जुटे रहते है।

प्रगतिशील किसान रामसेवक को बड़े-बड़े कार्यकर्मों में किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए बुलाया जाता है और सरकारी कार्यक्रमों में भी उनको आमंत्रित किया जाता है। रामसेवक कई तरह की जैविक सब्जियों की खेती करते हैं उनके यहां की सब्जियां बिहार के कई क्षेत्रों में जाती है। उनके जैविक सब्जी और फल की बिक्री पूरे बिहार में है। उनके सब्जी उत्पादों जैसे बैंगन, तोरई, मशरूम, खीरा, मिर्च, गोभी और फल जैसे आम, आदि की खपत राज्य के भीतर ही हो जाती है। उनको अपने काम में सफलता मिल रही है। आज साढ़े पांच एकड़ जमीन में उन्हें साल का साढ़े तीन लाख से अधिक का मुनाफा है। उनकी ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं राज्य के मुख्यमंत्री नितिश कुमार उनकी तारीफ़ कर चुके हैं और उनके खेतों का मुआयना कर चुके हैं। अब वह दूसरे किसानों को भी प्रशिक्षित करते हैं। रामसेवक का प्रयास है कि अधिक से अधिक युवाओं को खेती के साथ जोड़ें। वह चाहते हैं कि राज्य के युवा किसानों को अत्याधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे खेती में अच्छा मुनाफा कमा सके। उनका मानना है कि आज भी राज्य के किसान परम्परागत तरीके से खेती करते हैं जिससे उनको ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता है। किसान रामसेवक ने काफी सराहनीय कृषि कार्य किए है। कृषि क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य लिए CEAT Tyres किसान रामसेवक को सलाम करता है और अपने कार्यक्रम CEAT Tyres farmer salute प्रोग्राम के तहत उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है।

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