बैंक की नौकरी छोड़ शुरु किया जैविक खेती का व्यवसाय

भारत में प्राचीन समय से ही जैविक खेती का काम होता रहा है लेकिन जैसे-जैसे समय बदलता गया, वैसे ही खेती करने के तरीकों में तेजी से बदलाव आता गया। देश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या के लिए किसान अधिक फसल उत्पादन लेने की सोच रहे हैं। इसी चक्कर में किसान अंधाधुंध कृषि रसायनों और उर्वरको का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे पर्यावरण, मानव शरीर, जानवर सभी पर बुरा असर पड़ रहा है। रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से हर रोज नई-नई घातक बीमारियां जन्म ले रही हैं। ऐसे में मेरठ के दो युवा किसान भारत की प्राचीन धरोहर यानी जैविक खेती की अलख जगा रहे हैं। मेरठ के गौरव ज्ञान और सुधांशु दोनों ऐसे व्यक्ति है जो बड़े पैमाने पर जैविक खेती का कार्य कर रहे हैं, साथ ही जैविक खाद उत्पादन कर रोजगार भी कर रहे हैं। जैविक खाद को दूर-दूर तक पहुंचाने के लिए गौरव ज्ञान और सुधांशु ने एस एंड जी एंटरप्राइज की शुरुआत की और इससे अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं। वे किसानों को जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

गौरव और सुधांशु द्वारा जैविक खाद उत्पादन शुरू करने के पीछे का कारण भी बड़ा रोचक रहा है। सुधांशु ने बताया कि बैंक में नौकरी करने के दौरान पता चला कि उनको थाइरोइड कैंसर है। इसके बाद सुधांशु ने हार नहीं मानी और उन्होंने इसका इलाज कराया। ईश्वर की कृपा से ने आज सुधांशु पूरी तरह से स्वस्थ है। सुधांशु बताते हैं कि वो किसी भी मादक पदार्थ का सेवन नहीं करते थे इसके बावजूद उनको इन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा तब उनको अहसास हुआ कि यह परेशानी रसायनयुक्त खाद्य पदार्थों से हुआ है। इस घटना ने सुधांशु को भीतर तक झकझोर कर रख दिया। तभी से सुधांशु और गौरव ने ठान लिया कि कुछ ऐसा करना है जिससे की उनके साथ दूसरे लोगों को भी इस रसायनयुक्त खाद्य पदार्थों से मुक्ति मिल सके। तभी से गौरव और सुधांशु ने मिलकर एस. जी. एंटरप्राइज की शुरुआत की।

बैंक की नौकरी छोड़ कम निवेश से शुरू किया जैविक खाद उत्पादन :

गौरव ज्ञान बताते हैं कि वो और सुधांशु बैंक में अच्छी पोस्ट पर कार्यरत थे। उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ दी और 2 लाख रूपये लगाकर 20 बेड के साथ जैविक खाद का उत्पादन शुरू किया। मात्र 3 साल के में ही इस यह व्यवसाय 15 गुना बढ़ गया। इस समय उनके पास 300 से अधिक वर्मी कम्पोस्ट बेड में जैविक खाद बनाते है। इस जैविक खाद को देश के कई राज्यों सप्लाई कर रहे हैं। इस समय अच्छी गौरव और सुधांशु अच्छी आय ले रहे हैं।

किसानों को कर रहे हैं जागरूक :

गौरव और सुधांशु दोनों अपने साथ अन्य किसानों को भी जोड़ रहे हैं। किसान जैविक खाद का उत्पादन कैसे कर सकता है इसके लिए वे किसानों को जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। गौरव बताते हैं कि किसान अपने घर पर ही बहुत कम निवेश के साथ 1 या 2 बेड वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार कर सकते हैं। सुधांशु बताते हैं कि उनकी टीम किसानों को कम से कम 1 बीघा खेत में जैविक खाद उत्पादन के लिए प्रेरित कर रही है। यानी किसान कम से कम 1 बीघा खेत में जैविक खाद को तैयार करें और उसे अपने खेत में इस्तेमाल करें ताकि अपने घर के सभी सदस्यों को रसायनमुक्त फल सब्जियां खिला सकें। 

किसान आसानी से प्राप्त कर सकते हैं जैविक खाद

एसजी एंटरप्राइज के ब्रांड गौसुध नाम से यह जैविक खाद मार्केट में उपलब्ध है। इस जैविक खाद को किसान आसानी से प्राप्त कर सकते है। यह खाद पूरी तरह से सुरक्षित पैकिंग में उपलब्ध है। गौरव ज्ञान बताते हैं कि आज के समय में जैविक खाद का इस्तेमाल बहुत ही अनिवार्य हो गया है और किसानों के मध्य इसकी मांग लगातार बढती जा रही है। इसको लेकर एसजी एंटरप्राइज की टीम प्रदेशभर में जैविक खाद को लेकर जागरूकता अभियान भी चला रही है।

दूसरों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत :

गौरव ज्ञान और सुधांशु इस समय उन लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गए हैं, जो मानते हैं की खेती में कुछ नहीं रखा है। ये दोनों अन्य लोगों और किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। इसी के साथ किसानों को अपने साथ जोड़कर उनको जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

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