मजदूर जो बन गये सफल किसान

शंकर लाल एक ऐसे किसान हैं जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। 60 वर्षीय शंकर लाल उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के मूल निवासी है जो एक समय प्रवासी मजदूर थे। साल में दो बार, फसल मौसम के दौरान वह पंजाब की यात्रा करते थे और वहां खेतों में मजदूरी का काम करते थे। उन्होंने सब्जियों की खेती में लाभ होता देख खुद खेती करने के बारे में सोचा। उन्होंने पंजाब में बसने और वहां सब्जी की खेती करने की योजना बनाई। अंत में उन्होंने उत्तर प्रदेश को छोड़ दिया और पंजाब में आकर बस गये। सब्जियों की खेती करने के लिए उन्होंने डेढ़ एकड़ जमीन पट्टे पर लिया।

शंकर लाल ने अब बरनाला जिले के धानेर गांव को अपना घर बना लिया है। उसकी पत्नी और वह डेढ़ एकड़ के भूखंड पर सब्जियों की खेती करते हैं और पड़ोसी शहर मेहल कलां में एक कमीशन एजेंट को अपनी उपज बेचने के बाद अच्छा आमदनी पा रहे है और अच्छा जीवन यापन कर रहे हैं। उनके लाभ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे  पट्टे पर ली गई जमीन का एक साल में 50,000 रुपये का किराया देते हैं।

बिहार के सीतामढ़ी जिले के मदन साह ने बिहार से आकर पंजाब में पनाह ली और एक स्थानीय किसान से प्रति एकड़ 50,000 रुपये में 15 एकड़ जमीन किराए पर ली है। जहां वे गोभी, धनिया, शलजम, गाजर और ब्रोकोली उगाते हैं और पंजाब के शहरों में अपने उत्पाद को बेचते हैं। उन्होंने बताया कि अगर फसल अच्छी होती है, तो हमें खन्ना और लुधियाना के बाजारों में अच्छी दर मिलती है। हम प्रति एकड़ 1 लाख रुपये भी कमा लेते हैं। उन्होंने कहा कि हमें प्रति एकड़ केवल 25,000 रुपये का मुनाफा होता है और फसल को बढ़ने में छह महीने लगते हैं। इस प्रकार वे सब्जियों के द्वारा अच्छी आमदनी कमा रहे हैं।

बिहार के मुजफ्फरपुर के 52 वर्षीय गणेश प्रसाद की कहानी काफी शानदार है। उन्होंने खुद किसान बनने का साहस और आत्मविश्वास पाने से पहले 20 साल तक एक मजदूर के रूप में काम किया। उन्होंने कहा कि मैं एक स्थानीय जमींदार से किराए पर ली गई 15 एकड़ जमीन पर कुछ वर्षों से सब्जियां उगा रहा हूं। सब्जियां उगने में कम समय लेती हैं लेकिन देखभाल की बहुत जरूरत होती है। मैं दिन में 16 घंटे काम करता हूं, फसल को पानी देता हूं, खरपतवार निकालता हूं और नियमित रूप से रोगों व बिमारियों की जांच करता हूं।

उन्होंने कहा कि हमने दालों और अनाज की खेती करने की कोशिश की, लेकिन विपणन की समस्या और फसलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने मैंने गेहूं और धान से मुंह मोड़ लिया। अब मैं सब्जियों की खेती कर अच्छी आय प्राप्त कर रहा हूं।

प्रवासी मजदूरों में से कुछ अब अपने हाथों से खेती करते हैं। बिहार के सीतामढ़ी जिले के छोटे लाल ने मंडी गोविंदगढ़ के अजनाली गांव में 14 एकड़ ज़मीन किराए पर ली है एक साल में तीन बार सब्जियों का उत्पादन करते है। सब्जियों ने उन्हें अच्छा लाभ दिलाया है।

लाल ने कहा कि अनाज उगाने की तुलना में सब्जियों को उगाने में बहुत मेहनत लगती है लेकिन यह जल्दी भुगतान देने वाली भी कर सकता है। हम खेत में मदद करने के लिए तीन या चार मजदूरों को काम पर रखते हैं। खन्ना और मंडी गोबिंदगढ़ क्षेत्रों में लगभग 60 प्रवासी मजदूर हैं जिन्होंने सब्जियां उगाना शुरू कर दिया है।

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