Fasal Krati

ऑर्गेनिक खेती की पहचान हैं कुशिका और कनिका

Last Updated: September 19, 2019 (03:08 IST)

आज के युवा शहरी चमक धमक से प्रभावित हो कर शहरों में बसने की चाह में गांवों से तेजी से पलायन कर रहे हैं, लेकिन आज भी कुछ ऐसे भी युवा हैं जो महानगरों की चमक-धमक और अच्छी ख़ासी नौकरी और समस्त सुख सुविधाओं को छोड़, अपने गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।
इसी कड़ी में उत्तराखंड की दो बेटियां, कुशिका शर्मा और कनिका शर्मा ने दिल्ली जैसे महानगर की नौकरी और सुख सुविधाएं सिर्फ इसलिए छोड़ दी ताकि गावों को नई जिंदगी दे सकें। कुशिका और कनिका ने अनुभव किया कि रोज की भागदौड़ में वो सुकून नहीं था जो पहाड़ की वादियों में था। दोनों बहनों ने तय किया कि वो सब कुछ छोड़कर उत्तराखंड में बसे अपने गाँव मुक्तेश्वर में जाकर गाँव की प्रगति में अपना योगदान देंगी।
परिवार का समर्थन मिलने पर वे गांव आ गई और ऑर्गेनिक खेती के प्रति लोगों को जागरूक करने लगी। दोनों बहनों ने अपने गांव में बकायदा ‘दयो – द ओर्गानिक विलेज रिसोर्ट’ का शुभारंभ किया। दोनों बहनों के प्रयास से उत्तराखंड के अन्य गांवों को भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इन बहनों के मेहनत का ही परिणाम है की वे जैविक रूप से तैयार कृषि उत्पादों को बेचने के लिये सप्लाई चेन भी बना चुकी हैं।
कुशिका और कनिका ने बताया कि उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा उत्तराखंड के नैनीताल और रानीखेत से पूरी की। कुशिका ने कहा कि स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद मैंने एम.बी.ए करने का निर्णय लिया। एम.बी.ए करने के बाद मैंने करीब चार साल तक गुड़गांव की एक मल्टी नेशनल कंपनी में बतौर सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के रूप में कार्य किया। उनकी बहन कनिका ने दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से प्रथम अंको के साथ मास्टर्स की डिग्री हासिल की जिसके बाद कनिका को हैदराबाद में आंट्रप्रेन्योरशिप में स्कॉलरशिप भी मिल गई।
अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में दोनों बहनों को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में हमें अपने परिवार से दूर रहना पड़ता था। ऐसे में हमें उनकी बहुत याद आती थी। जब भी हमें मौका मिलता था तो हम दोनों अपने परिवार से मिलने के लिये नैनीताल पहुंच जाती थी।


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