Fasal Krati

जैविक खेती कर लाखों की कमाई कर रहे हैं अभिषेक

Last Updated: August 30, 2019 (02:29 IST)

खेती किसानी का काम घाटे का सौदा माना जाता रहा है। यही कारण है कि किसान अपने बेटों को किसानी नहीं करने देना चाहते। किसान भी अपने बेटों को पढ़ा लिखा कर अच्छे पद पर देखना चाहते हैं। इसी का नतीजा है कि गत् कुछ वर्षों में तेजी से गांवों से लोग पलायन कर शहरों में निवास कर रहे हैं। खेती में युवा पीढ़ी बहुत कम नजर आ रही है। इसी बीच अभिषेक धामा जैसे कुछ युवा किसान खेती में अपना नाम कर रहे हैं। अभिषेक दिल्ली के पल्ला गांव के एक प्रगतिशील किसान हैं जो 25 एकड़ भूमि में खेती करते हैं। इंजिनीयरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके अभिषेक खेती में परचम लहरा रहे हैं।

फसल क्रांति टीम से बातचीत करते हुए अभिषेक ने बताया कि मैंने इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती करने की सोचा क्योंकि मुझे लगा कि नौकरी करने से अच्छा खेती को ही व्यवसाय बनाया जाय। उन्होंने बताया कि मैं 14 एकड़ की खेती जैविक विधि से कर रहा हूं और अगले वर्ष तक बाकी 11 एकड़ को भी जैविक विधि से ही करूंगा। उन्होंने बताया कि मैं जैविक विधि से ज्यादातर सब्जियों की खेती कर रहा हूं जिसके कारण उत्पादन और लाभ दोनों में बढ़ोत्तरी हुई है।

उन्होंने 2 एकड़ में बैंगन, 2 एकड़ में लौकी, 2.5 एकड़ में तोरी, 1.5 एकड में अगेती फूलगोभी और 2 एकड़ में हरी मिर्च को लगाया है। इसके साथ ही हमने 1.5 एकड़ में टमाटर की पौध तैयार की है जिसे जल्द ही लगा दिया जाएगा। इसकी मार्केटिंग कहां और कैसे करते हैं पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हमारे बिग बास्केट, मिल्क बास्केट मदर डेयरी, इत्यादि कई प्राइवेट वेन्डर्स हैं जहां हम अपनी फसलों को बेचते हैं। इसके अलावा कुछ लोग हमसे सीधे तौर पर जुड़े हैं जो हमारे खेत से ही फसलों को खरीदते हैं।

जैविक खेती के लिए इतनी खाद की उपलब्धता कैसे होती है पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जैविक खाद के लिए हमने 3.5 लाख की लागत से 32 घन मीटर का गोबर गैस प्लांट लगाया है जिससे हमारे खेती के लिए पर्याप्त खाद निकल आता है। उन्होंने बताया कि इसको मैंने बिना सब्सिडी की मदद से स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि इसको लगाने से यह फायदा हुआ है कि हमें अपनी खेती के लिए पर्याप्त खाद मिल जाता है और हमें एलपीजी गैस भी नहीं खरीदना पड़ता। पिछले 14 महीनों से गोबर गैस से ही हमारे घर में कुकिंग का काम होता है। इस तरह हम पैसे की भी बचत कर रहे हैं। उन्होने कहा कि मैं सुगंधित पौधों की भी खेती करने जा रहा हूं। जिससे सुगंधित तेल निकलता है। उसके आसवन क्रिया के लिए मैं प्लांट बायो गैस पर ही लगाने जा रहा हूं। 

उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि अगर कोई किसान इसे लगाना चाहता है तो वो अपने जिले के कृषि विज्ञान केन्द्र में जाकर इसकी जानकारी ले सकता है। वहां गोबर गैस के अनुदान के बारे में भी जानकारी दी जाती है। उन्होंने किसानों से कहा कि किसान भाई भी जैविक खेती करें क्योंकि रासायनिक खादों से मिट्टी भी दूषित होती है और मानव स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। किसान पूर्वजों की इस परंपरा को नई तकनीकियों के साथ अगर आगे बढ़ाए तो खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।


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