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शून्य बजट खेती का अध्ययन

Last Updated: July 13, 2019 (03:25 IST)

सरकार ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को शून्य बजट खेती योजना को देशव्यापी स्तर पर लागू होने से पहले उसके परिणामों पर एक अध्ययन करने के लिए कहा है। नीति आयोग के सदस्य और कृषि अर्थशास्त्री रमेश चंद ने बताया कि दो से तीन महीनों में रिपोर्ट आने की उम्मीद है।

रमेश चंद ने कहा कि शून्य बजट खेती के तथ्यों पर अब तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अब आईसीएआर उसका अध्ययन कर रिपोर्ट नीति आयोग को प्रस्तुत करेगा।

शून्य बजट खेती को कई क्षेत्रों में कम लागत के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के भारी उपयोग के प्रचलित तरीकों के लिए प्राकृतिक विकल्प ढूंढा जा रहा है। राज्य सरकार और कर्नाटक के कुछ विश्वविद्यालयों ने रबी फसल पर शून्य बजट खेती पर वैज्ञानिक विश्लेषण किया है। हम अब खरीफ के रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिसे इस साल के अंत तक आने की संभावना है।

हम इस अध्ययन विधि के द्वारा खेती की जांच करेंगे और मिट्टी के स्वास्थ्य, उत्पादकता, खाद्य उत्पादन, आजीविका और कृषि की स्थिरता पर बड़े पैमाने पर शून्य बजट खेती को बढ़ावा देने के अपेक्षित प्रभाव का आकलन करते हुए खेतों में उच्च परिणामों के लिए उपाय सुझाएंगे।


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