बारिश ने तोड़ा 25 वर्षों का रिकॉर्ड

भारतीय मौसम विभाग के एक आंकड़ें में यह खुलासा किया गया है कि जून-सितंबर मॉनसून सीज़न के दौरान हुई बारिश ने 25 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। आंकडे में कहा गया है कि  जून में सूखे की स्थिति थी लेकिन जून के उत्तरार्ध में शुरू हुई जो सितंबर तक खूब हुई। इस सीजन में 10 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड किया गया जिसके कारण कई प्रदेशों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छे मानसून का मतलब अच्छी कृषि है। मानसून का समग्र प्रदर्शन यह दर्शाता है कि खरीफ फसलों की पैदावार अच्छी होगी और देर से आने वाली वर्षा सर्दियों में बोई जाने वाली फसलों की बम्पर पैदावार के लिए जमीन तैयार करता है। अच्छा मानसून होने से जलाशयों में बहुत अधिक पानी रहता है इसलिए फसलों की सिंचाई भी प्रचुरता से हो जाती है। इससे साथ ही पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त आपूर्ति मिलेगी। इस वर्ष का मानसून असामान्य रहा है, जिससे मुंबई, पुणे और पटना जैसे शहरों और साथ ही मध्य और पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति हुई। तीव्र वर्षा के कारण तिलहन की फसल प्रभावित हुई है।

आधिकारिक तौर पर दिखाए गए आंकड़ों के मुताबिक, फसल की पैदावार पिछले साल के स्तर के बराबर है। कृषि मंत्रालय के पहले अनुमान के मुताबिक इस सीजन में खाद्यान्न का कुल उत्पादन 140.57 मिलियन टन होने का अनुमान है।

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