मत्स्य उद्योग अब करेगा दिन दुनी रात चौगुनी की तरक्की

केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में देश में मत्स्य उद्योग के बुनियादी ढाँचे को पुनर्जीवित करने, अंतर्देशीय मत्स्यपालन के दायरे का विस्तार करने, उत्पादकता बढ़ाने और निर्यात को दोगुना करने के लिए 25,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बना रही है।
मत्स्य विभाग के सचिव रजनी सेखरी सिब्बल ने कहा कि इस पूरी कवायद से मौजूदा समय में लगभग 47,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्यात में मदद मिलेगी। विभाग ने तीन टन प्रति हेक्टेयर उत्पादकता को दोगुना करने की भी उम्मीद की है।
सिब्बल ने बताया कि विभिन्न योजनाओं जैसे कि प्रधान मंत्री सम्पदा योजना और विश्व बैंक की योजना के माध्यम से धनराशि को और बढ़ाया जाएगा। हमने पहले ही 7,300 करोड़ रुपये के साथ मत्स्य बुनियादी ढांचा विकास निधि शुरू कर दी है। सिब्बल ने कहा कि यह एक इंटरवेंशन सबवेंशन स्कीम है। उन्होंने कहा कि बंदरगाह और लैंडिंग स्थलों को नया रूप देने के अलावा, सरकार प्रयोगशालाओं के लिए हैचरी, नर्सरी जैसी सुविधाएं विकसित करने के लिए संयुक्त उद्यम परियोजनाओं को विकसित किया जा रहा है।

निर्यात बढ़ाने के लिए मत्स्य विभाग ट्रेसबिलिटी के मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है। हमारा प्रयास उपभोक्ता को गुणवत्तावाली मछली उपलब्ध कराना है। सिब्बल ने कहा हम बीज तैयार करने और प्रमाणिकता के लिए प्रोटोकॉल सेट देंगे।

हम पहले ही नॉर्वे के साथ एक समझौता कर चुके हैं। जल्द ही आइसलैंड और डेनमार्क के साथ ट्राउट जैसी उच्च मूल्य की मछलियों के प्रजनन के लिए एक समझौता होने वाला है।

हम नाविकों के लिए लाइसेंस नंबर और बीमा प्रदान करेंगे। सिबल ने कहा कि लाइसेंस शुल्क से मछुआरों के कल्याण और सुरक्षा उपायों का विकास किया जाएगा।

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