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करनाल संस्थान ने विकसित किया कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली गेहूं की किस्में

Last Updated: August 13, 2019 (04:07 IST)

भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने तीन उच्च उपज वाले गेहूं की किस्मों, डीबीडब्ल्यू 243, डीबीडब्ल्यू 166 और डीबीडब्ल्यू 222 को विकसित किया है। ये किस्में उन क्षेत्रों में वरदान साबित होंगी जहां जल स्तर तेजी से घट रहा है। गेहूं की यह किस्में कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली हैं। सामान्य गेहूं की किस्मों में जहां बुआई से लेकर कटाई तक छः बार सिंचाई करने की आवश्यकता होती है वही इन नई किस्मों में सिर्फ चार सिंचाई की आवश्यकता होगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये किस्में लगभग 20 प्रतिशत पानी की बचत करेंगी।

अनुसंधान का समर्थन एग्री-कंसोर्टिया रिसर्च प्लेटफ़ॉर्म द्वारा किया गया था और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित किया गया था। डॉ. जीपी सिंह, निदेशक, करनाल संस्थान, डॉ. राज पाल मीणा, डॉ. वेंकटेश कर्णम, रिंकी खोबरा, रमेश कुमार शर्मा और एससी त्रिपाठी ने इन किस्मों को विकसित किया है। इन किस्मों को जल्द ही हरियाणा और पंजाब में खेती के लिए जारी किया जाएगा, जहां भूजल की कमी एक चुनौती है।

डीबीडब्ल्यू 243 प्रति हैक्टेयर 49 क्विंटल, डीबीडब्ल्यू -222, 45 क्विंटल और डीबीडब्ल्यू 166, 46 क्विंटल प्रति हैक्टेयर का उत्पादन करने में सक्षम है। भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. जीपी सिंह ने कहा कि ये किस्में पीले रतुआ रोग की प्रतिरोधी हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को जल्द ही किस्में इस्तेमाल करने को मिलेंगी।


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