नई तकनीक से होगा भारतीय कृषि का विकासः एम वेंकैया नायडू

देश में तकनीकी नवाचारों को लाने की आवश्यकता को दोहराते हुए, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि नवाचार अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

107वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में बोलते हुए नायडू ने कहा कि भारत की आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए नये दृष्टिकोण के माध्यम से नवाचार पर विशेष ध्यान देने के साथ अनुसंधान और विकास में और अधिक निवेश करने की आवश्यकता है। नायडू ने भारतीय उद्यमियों और कॉरपोरेट्स से देश में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए भारतीय शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग करने का भी आग्रह किया। उन्होंने उद्यमियों को भारत के प्रगतिशील विकास के लिए आवश्यक कहम उठाने का भी आग्रह किया।

नायडू ने कृषि जरूरतों के लिए भारत को आत्मनिर्भर बनने में मदद करने में एग्रीटेक के महत्व पर भी प्रकाश डाला। नायडू ने कहा कि यह याद रखना चाहिए कि भारत जैसा देश आयातित खाद्य सुरक्षा पर निर्भर नहीं रह सकता है और उसके पास खुद की घरेलू खाद्य सुरक्षा होनी चाहिए। जब तक भारत गंभीरता से एग्रीटेक को अपनाना शुरू नहीं करता, तब तक वह कृषि का व्यवसायीकरण नहीं कर सकता। कृषि मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता और मात्रा दोनों को कैसे बढ़ाया जा सकता है, इस पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को विभिन्न कृषि गतिविधियों जैसे कि छिड़काव, उपज के बाद की हैंडलिंग, जैसे अन्य कामों के लिए उन्नत मशीनरी बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

एग्रीटेक क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए, देहरादून स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (UPES) ने हाल ही में 'स्मार्ट कृषि स्कूल' स्थापित करने की घोषणा की है। कृषि क्षेत्र में नए समाधान बनाने के लिए संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बड़े डेटा, ड्रोन प्रौद्योगिकी जैसी अन्य तकनीकों का पाठ्यक्रम विकसित करेगा।

इस समारोह में उपराष्ट्रपति के अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी मौजूद थे। येदियुरप्पा ने कहा कि भारत को 5 ट्रीलियन डॉलर  अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ जनसांख्यिकीय लाभ उठाने की आवश्यकता है। 

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