रीवा के कृषि वैज्ञानिकों का टिड्डी दल की जिले से बाहर करने में अहम भूमिका- डॉक्टर अखिलेश

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविदयालय जबलपुर म. प्र. के कुलपति माननीय प्रो. पी के बिसेन के निर्देशन में कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि महाविदायल रीवा के प्रमुखों के मार्गदर्शन में वैज्ञानिको की एक समिति जो टिड्डी दल के आक्रमण की संभावना के संबंध में कृषको के बीच जागरूकता पहचान एवं प्रबंधन के लिए गठित की गई थी। जिसमे प्रोफेसर एम ए आलम डॉक्टर ए के पांडेय डॉक्टर डॉक्टर एम आर ढींगरा डॉक्टर अखिलेश कुमार और डॉक्टर केवल सिंह बघेल सक्रिय सदस्य है। कार्यक्रम समन्यवक डॉक्टर अखिलेश कुमार ने इस संदर्भ में पिछले एक हप्ते से समाचार पत्रों, ऑनलाइन कृषक संगोष्टि के माध्यम से, लोकल न्यूज़ चैनल, किसान मोबाइल संदेश, व्हाटसअप और कृषि अधिकारियों को व्हाटसअप के माध्यम से टिड्डी दल की आने की सूचना और आने के बाद किस प्रकार भगाना है और अगर रात में जिले के अंदर उनका विश्राम होता है तो किस प्रकार के कीटनाशकों का प्रयोग करना है के विषय में विस्तृत रूप से जानकारी दी गई।

इस बीच जब आपलोगो ने देखा होगा कि प्रथम दल जो अमरपाटन सतना जिले से झिंना टाइगर सफारी के पास दिनांक 26 मई2020 को प्रवेश कर रीवा के विभिन्न गाओं से होता हुआ गूढ़ क्षेत्र से सीधी जिले में चला गया उस दिन कृषि वैज्ञानिको का  दल जिला प्रशाशन और कृषको के साथ मिलकर टिड्डी दल को भगाने में सफल रहा। उसी दिन खबर लगी कि छतरपुर से दूसरा दल पन्ना की तरफ बढ़ रहा है जो अगले दिन सतना से होते हुवे सिरमौर ब्लॉक के रास्ते शाम को कुठूलिया होते हुवे बैसा, पंडोखर, हरदी शंकर और तमरा गांव के कुछ हिस्सों  में रुक गया।जिसमें ज्यादा ज्यादा अक्रमित क्षेत्र हरदी शंकर का था। इसी समय कृषि विभाग के अधिकारियों से वैज्ञानिको को सूचना मिली जिसके लिए वैज्ञानिक दल के सदस्यों द्वारा रात्रि में प्रकोपित गाओं का दौरा किया गया जहाँ  पर तहसीलदार महोदय के साथ कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करके टिड्डी दल को किस प्रकार नियंत्रित करेगे विषय पर चर्चा हुई साथ ही साथ कृषि अधिकारियों को किस प्रकार के कीटनाशको का प्रयोग उनकी मात्रा और प्रयोग करने का उपयुक्त समय पर सलाह दी गई।

अगले दिन सुबह वैज्ञानिको का दल हरदी शंकर गांव पुनः पहुचा जहा पर कलेक्टर महोदय कृषि अधिकारी उधयनिकी अधिकारी के उपस्थिति में टिड्डी दल नियंत्रण का जायजा लिया गया जिसमें मशीनों के माध्यम से पेड़ो में छिड़काव किया गया जिसके उपरांत वैज्ञानिको द्वारा कृषि अधिकारियों और कृषको को सलाह दी गयी कि आक्रमण वाले क्षेत्र के साथ खाली पड़े खेत की जुताई कल्टीवेटर या रोटावेटर के माध्यम से जुताई जरूर करे जिससे इस कीट के अंडे और शंखी नष्ट हो जाय और सतर्क रहें क्योकि अभी राज्य में और टिड्डी दल सक्रिय है जिन्हें हम ध्वनि विस्तारक यंत्रों जैसे नगाड़ा बजाना थाली बजाना ट्रेक्टर का साइलेंसर निकाल कर तेज आवाज करना ताली बजाने आदि से अपने क्षेत्र से बाहर कर सकते है और कुछ कीटनाशकों का प्रयोग कर नष्ट कर सके है।

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