फसल को विल्ट रोग बचाने के लिए किसानों को जरुरी सलाह

हिमाचल ठंडा प्रदेश होने के कारण राज्य में सब्जियां और बागवानी बड़े स्तर पर की जाती है. प्रदेश के किसानों की जीविका भी अधिकतर सब्जियों की खेती और बागवानी पर निर्भर है. हिमाचल में इस समय मटर, लहसुन , पालक आदि की बिजाई शुरू हो गई है . प्रदेश के विभिन्न जिलों में मटर, लहसुन आदि की खेती होती है. मटर की फसल में कई तरह की बीमारी लगने का खतरा रहता है. इसलिए नौणी विश्वविद्यालय ने किसानों को जरुरी सलाह दी है.

 विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष डॉ. सतीश भरद्वाज ने कहा कि किसान लहसुन की बिजाई से पहले खेत में हल्की सिंचाई कर लें और निराई गुडाई का ध्यान रखे. डॉ. भरद्वाज ने कहा की जिन क्षेत्रों में मटर की बिजाई की जा रही है वहां पर फसल में विल्ट रोग का खतरा लगा रहता है. इससे बचाव के लिए किसानों को बुवाई से पूर्व बीजोपचार करना अनिवार्य है. इसकी रोकथाम के लिए बिजाई से पूर्व बाविस्टिन 0.5 ग्राम बाविस्टिन 5 लीटर पानी में डालकर 2 घंटे तक बीजोपचार करें उसके बाद बिजाई करें. उन्होंने बताया की बिजाई के समय मटर बीज की बुआई सीडड्रिल या देशी हल से पंक्तियों में की जाती है.

 जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेंतिमित्र तथा पौधे से पौधे की दूरी 5 से 7 सेंटीमीटर और मध्यम अवधि की पकने वाली किस्मों में  पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेंटीमीटर एवं बीज से बीज की दूरी 7 से 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बीज की बुआई 5 से 7 सेंटीमीटर गहराई पर करें. बुआई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है.

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