हिमाचल में बांस की खेती को बढ़ावा देगा कृषि विभाग

किसान को किसी फसल में नुकसान होता है तो अकसर उसकी खेती करना छोड़ देता है। बांस की खेती देश में प्राचीन काल से होती रही है। उत्तर पूर्व भारत में बांस की खेती की जाती है लेकिन उत्तर भारत के भी कुछ राज्यों में बांस की खेती होती है। मौजूदा समय में बांस की खेती को किसानों ने कम कर दिया है। उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश में बांस की खेती की जाती है, लेकिन पिछले कुछ समय में यहाँ पर बांस की खेती में कमी आई है। अब राज्य के कृषि विभाग ने बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए अपनी कमर कस ली है। राज्य के कई जिलों शिमला, नौणी आदि में बांस की खेती होती है।

इसके लिए कृषि विभाग 20.34 करोड़ रुपए खर्च करेगा। विभाग बांस की नर्सरी से लेकर मार्केट तक किसानों को सहयोग प्रदान करेगा और स्वरोजगार स्थापित करने में सहायता प्रदान करेगा। ध्यान रहे बांस से टोकरी, सजावटी सामान आदि बनाए जाते हैं, इसके अलावा इसकी पत्तियों को भी चारे आदि के रूप में इस्त्र्माल किया जाता है। इसलिए राज्य में बांस की खेती को बढ़ावा मिलने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

जिन किसानों के पास ज़मीन नहीं है, कृषि विभाग उन किसानों को खाली ज़मीन भी उपलब्ध कराएगा। पौधों की बुवाई से लेकर उनके रख-रखाव और काटने तक की जिम्मेदारी किसानों की होगी। बांस को जंगल से काटने के लिए किसानों को वन विभाग की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। बांस की खेती करने के लिए विभाग की ओर से ब्लॉक के हर गांव के करीब 25 से 30 किसानों का समूह बनाया जाएगा। इसके साथ विभाग की ओर से किसानों को जल्दी बढ़ने वाले बांस के पौधे दिए जाएंगे।  बांस की खेती के लिए वन विभाग पूरी तरह से किसानों को सहायता प्रदान करेगा।

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