मध्य प्रदेश में होगी काजू की खेती

वैसे तो काजू का मूलस्थान ब्राजील है जहां बड़े पैमाने पर काजू की खेती की जाती है। 16वीं सदी के उत्तरार्ध में उसे वनीकरण और मृदा संरक्षण के प्रयोजन से भारत लाया गया था। देश के पश्चिमी और पूर्वी समुद्र तट के आप-पास के आन्ध्रप्रदेश, गोवा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओड़िशा, तमिलनाडू और पश्चिम बंगाल में खेती होती है। इसके अलावा असम, छतीसगढ़, गुजरात, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा के कुछ इलाकों में भी काजू की खेती की जाती है।

इसी बीच मध्य प्रदेश में भी काजू की खेती करने की आस जग गई है। मध्य प्रदेश के बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट और सिवनी जिले में जल्द ही काजू की खेती की जाएगी। प्रयोग के तौर इन जिलों में पहले 1430 हेक्टेयर जमीन पर 60 लाख काजू के पौधे लगाए गये हैं। काजू संचालनालय के डायरेक्टर डॉ। वेंकटेश ने इन जिलों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार की और कहा कि यहां की जलवायु काजू उत्पादन के लिए अनुकूल है। काजू एवं कोको विकास निदेशालय कोच्ची ने किसानों के बीच 1 लाख 25 हजार काजू के अतिरिक्त पौधे उपलब्ध कराये जा रहे हैं।  उन्होंने बताया कि बैतूल में काजू की वेंगरूला- 47 प्रजाति यहां की जलवायु के अनुकूल है।

इन जिलों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना रफ्तार के तहत काजू क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम को लागू कर दिया गया है। बैतूल में 1,000, छिंदवाड़ा में 30, बालाघाट और सिवनी में 200-200 किसानों ने अपनी जमीन पर काजू के पौधे लगाए हैं। औसतन सभी किसानों ने एक-एक हेक्टेयर क्षेत्र में काजू के पौधे रोपे हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्र में 200 पेड़ रोपे गए हैं, प्रति पेड़ के बीच की दूरी सात मीटर की होती है।

राज्य के कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा है कि सरकार की ओर से किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के प्रयास जारी हैं, किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ किया गया है, बिजली बिल आधा कर दिया गया, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी 50 प्रतिशत की गई है। इसी तरह किसानों को नगदी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। काजू की खेती भी उसी दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है।

More on this section