कृषि मंत्री ने 13 भूमि एवं जल संरक्षण योजनाओं का किया उद्घाटन

बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार द्वारा बामेती,  पटना में राज्य योजना के अंतर्गत भूमि एवं जल संरक्षण की योजनाओं का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर कृषि मंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि अभी राज्य ग्लोबल वार्मिंग के दौर से गुजर रहा है, इसके कारण राज्य में अनियमित वर्षा होती है, जिससे फसलों की उत्पादन एवं उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे निदान पाने के लिए सरकार द्वारा राज्य में जल-जीवन-हरियाली अभियान चलाया जा रहा है।

इसी के मद्देनजर कृषि विभाग द्वारा भी उद्यान निदेशालय एवं भूमि संरक्षण निदेशालय के माध्यम से कई योजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इसी क्रम में पटना में 83.34 लाख रूपये की लागत से क्रियान्वित किये जा रहे 13 योजनाओं का लोकार्पण किया गया है। इसमें 12 योजनाओं आहर-पईन के जीर्णोद्धार की योजना है, जिस पर 76.73 लाख रूपये व्यय किये गये हैं। साथ ही, 6.61 लाख रूपये की लागत से एक पक्का चेक डैम का निर्माण किया गया है। ये सभी योजनाएँ मसौढ़ी एवं धनरूआ प्रखण्ड के विभिन्न पंचायतों में सामुदायिक लाभ की है। इन योजनाओं से लगभग 325 किसान परिवारों को लाभ मिलेगा। साथ-ही-साथ इन योजनाओं के जीर्णोंद्धार एवं निर्माण से लगभग 40 हजार घन मीटर सिंचाई जल का संग्रहण भी होगा, जिससे लगभग 350 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई की जा सकेगी। इस प्रकार  ये योजनाएँ इस क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगी।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से निपटने के लिए भूमि संरक्षण निदेशालय द्वारा राज्य के 17 जिले बाँका, मुंगेर, जमुई, नवादा, गया, रोहतास, औरंगाबाद, कैमूर, लखीसराय, भागलपुर, शेखपुरा, बक्सर, भोजपुर, जहानाबाद, नालन्दा, अरवल एवं पटना में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना प्रति पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना संचालित किया जा रहा है। राज्य में 4,495 विभिन्न भूमि एवं जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया जायेगा। 166 फीट ग् 100 फीट ग् 8 फीट आकार के 560 वाटर हार्वेस्टिंग टैंक तथा 100 फीट 66 फीट 10 फीट आकार के 655 फार्म पाऊण्ड का निर्माण किया जायेगा। साथ ही, 232 सामुदायिक सिंचाई कूप का भी निर्माण होगा। 245 पक्का चेक डैम के निर्माण के साथ ही 1509 आहार-पईन का जीर्णोद्धार किया जायेगा।

डा॰ प्रेम कुमार ने कहा कि इन योजनाओं के कार्यान्वयन से जहाँ खेती वर्षा पर आधारित है, वहाँ फसलों की सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित हो पायेगी। वर्षाजल  से एक ओर जहाँ ग्राउण्ड वाटर रिचार्ज हो पायेगा, वहीं उसकी बचत भी होगी। साथ ही, सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने से फसल उत्पादन बढ़ेगा, लागत मूल्य घटेगा एवं किसानों के आमदनी में वृद्धि होगी।

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