कृषि बाजार विकास के लिए भारत और जर्मनी में समझौता

सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि नीतियों में सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। देश में कृषि सुधार के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कृषि बाजार का विकास। किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या अपने कृषि उत्पादों को बाजार में बेचने की है। किसान सही दामों पर अपने कृषि उत्पाद नहीं बेच रहा है। हाल ही में कृषि मंत्रालय ने देश में कृषि बाजार के विकास के लिए जर्मनी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने एक संयुक्त संकल्प पत्र पर हस्ताक्षर किए। भारत की ओर से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और जर्मनी की ओर से कृषि एवं खाद्य मंत्री जूलिया क्लोकनर ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत की प्राथमिकता फसलों के उत्पादन केन्द्रित होने से किसान केन्द्रित होने में बदली है। उन्होने कहा इसका लक्ष्य कृषि और उससे संबन्धित क्षेत्र में उत्पादकता में सुधार, लागत में कमी प्रतिस्पर्धी बाजार कि उपलब्धता आदि के माध्यम से किसानों कि आय को दोगुना करना है। इस हस्ताक्षर के तहत सरकार का लक्ष्य कृषि निर्यात नीति को बढ़ावा देना है। इस मौके पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कृषि निर्यात नीति का लक्ष्य साल 2022 तक दोगुना कर छह करोड़ डॉलर करना है। 

जर्मनी की कृषि मंत्री जूलिया क्लाकनर ने कहा कि जर्मनी को कृषि यंत्रीकरण में विशेषता हासिल है। फसल तैयार होने के बाद उसके प्रबंधन के लिए जर्मनी के पास तकनीक है । उन्होने कहा कि इससे किसानों कि आय को दोगुना करने में मदद मिलेगी। उन्होने कहा कि इससे भारत के किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस मौके पर दोनों देश के कृषि मंत्रियों ने कृषि यांत्रिकीकरण, फसल तैयार होने के बाद प्रबंधन के अलावा भी कई अन्य कृषि मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों के मध्य हुए इस समझौता हस्ताक्षर से कृषि निर्यात में भी सुधार होगा और भारत से कृषि उत्पादों को निर्यात करने में मदद मिलेगी।  

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