कोविड-19 के चलते मछली निर्यात में 5-10 प्रतिशत की कमी

केंद्रीय मछली पालन मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कोविड-19 संकट के मद्देनजर मछली की मांग में 5-10 प्रतिशत कमी होने की संभावना है। देश ने वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 46,589 करोड़ रुपये मूल्य की मछली का निर्यात किया था। भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा मछली निर्यातक है। अमेरिका, मध्य पूर्व, ब्रिटेन और चीन मछली के मुख्य निर्यात स्थल हैं। सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएमएसवाई) के बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा कि नवीनतम इनपुट के अनुसार, निर्यात पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं है। निर्यात में अधिकतम 5-10 प्रतिशत की गिरावट ही होगी।

कोविड-19 बीमारी से लड़ने के लिए राष्ट्रव्यापी तालाबंदी के शुरुआती दिनों के दौरान शिपमेंट प्रभावित हुए थे। लेकिन सरकार ने अप्रैल के मध्य से लॉकडाउन नियम से मछली पकड़ने की गतिविधियों को छूट देने के बाद स्थिति में सुधार करना शुरू कर दिया। सिंह ने कहा कि चीन सहित प्रमुख स्थलों के लिए शिपमेंट अभी हो रहा है।

मत्स्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुछ देशों में तालाबंदी के कारण सुस्त वैश्विक मांग के कारण देश के निर्यात पर असर पड़ा है। लेकिन, अब स्थिति में सुधार होने लगा है और निर्यात में सामान्य स्थिति जल्द आने की उम्मीद है।

यह कहते हुए कि आने वाले वर्षों में भारत के मछली निर्यात को बढ़ाने की बहुत बड़ी संभावना है, मंत्री ने कहा कि सरकार की समुद्री शैवाल और सजावटी मछली के निर्यात को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में स्व सहायता समूहों के माध्यम से समुद्री शैवाल और सजावटी मछली की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र 2-3 राज्यों में समुद्री शैवाल पर काम कर रहा है।

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