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कृषि को करोड़ों का लाभ दे रहा मौसम विभागः आनन्द शर्मा

Last Updated: January 25, 2019 (01:11 IST)

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), जिसे सामान्य तौर पर मौसम विभाग भी कहा जाता है, भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक एजेंसी है। यह मौसम संबंधी टिप्पणियों, मौसम की भविष्यवाणी मौसम आधारित कृषि सलाह और भूकंपीय विज्ञान की प्रमुख एजेंसी है। आईएमडी का मुख्यालय दिल्ली में है और यह भारत और अंटार्कटिका के सैकड़ों अवलोकन स्टेशनों का संचालन करती है। मुंबई, कोलकाता, नागपुर और पुणे में इसके सहायक कार्यालय हैं।

आईएमडी विश्व मौसम विज्ञान संगठन के छह क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्रों में से एक है। जो उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए पूर्वानुमान, नामकरण और वितरण के लिए जिम्मेदारी लेता है, जिसमें मलक्का जलडमरू, बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और फारस की खाड़ी शामिल हैं। वर्तमान समय में इसके उप महानिदेशक आनन्द शर्मा जी हैं।

आनंद शर्मा जी आईएमडी, नई दिल्ली की एएएसडी इकाई में डीडीजीएम / क्षेत्रीय समन्वयक, पश्चिमी और मध्य हिमालय के रूप में कार्यरत हैं। आपने क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली में डीडीजीएम के रूप में काम किया। आप 2002 से 2015 तक संस्थापक निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून में कार्यरत रहें। आपने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पर्यावरण विज्ञान में एम.फिल की डिग्री और कृषि मौसम विज्ञान में एम.एससी की डिग्री पीएयू, लुधियाना और बीएससी (ऑनर्स) की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरा किया। आनंद शर्मा जी राष्ट्रीय छात्रवृत्ति, गेट फेलोशिप और यूएनडीपी / डब्ल्यूएमओ फैलोशिप के प्राप्तकर्ता भी हैं। उनकी रुचियों के मुख्य क्षेत्र वेदर प्रेडिक्शन, क्रॉप वेदर सिमुलेशन, एग्रो एडवाइजरी, माउंटेन मौसम विज्ञान, एक्सट्रीम वॉर्निंग ऑफ एक्सट्रीम वेदर सिस्टम एंड डिजास्टर मैनेजमेंट और पर्यावरण जागरूकता इत्यादि हैं।

उन्हें मौसम पूर्वानुमान और भारी वर्षा की भविष्यवाणी हेतु संयुक्त राज्य अमेरिका, (अर्ली वार्निंग) फ्रांस और भारत में प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने IMD में कई स्थानों, जैसे कि पुणे, बैंगलोर, गंगटोक, देहरादून और नई दिल्ली में काम किया है। आप कई राज्यों / राष्ट्रीय परियोजनाओं जैसे कि यूप्रोब  (उत्तराखंड के स्कूलों में 100 वेधशाला स्थापित करने के लिए वित्त पोषित परियोजना), फॉग-फील्ड प्रयोग (रिकॉर्ड समय में इंस्ट्रूमेंट की स्थापना), उत्तराखंड में हाइड्रो-मौसम संबंधी घटनाओं की प्रारंभिक चेतावनी के साथ जुड़े रहे हैं। आनंद शर्मा ने 30 से अधिक पत्र प्रस्तुत किए हैं और देहरादून के जलवायु विज्ञान पर एक पुस्तक प्रकाशित की है। उन्हें तीन मौकों पर हिंदी में राष्ट्रीय संगोष्ठी (एमओईएस द्वारा आयोजित) में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा भी आपको कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है। जैसे वायुमंडलीय विज्ञान में उत्कृष्टता के लिए एमओईएस पुरस्कार', 'सर्वश्रेष्ठ मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून (उनके नेतृत्व में)', आरंभिक चेतावनी में सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों के लिए हुडको पुरस्कार '(एक लाख रूपये), दून रतन पुरस्कार, उत्तराखंड रत्न, वीर केसरी चंद पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार, ऑनर ऑफ उत्तराखंड इत्यादि। आप वन अनुसंधान संस्थान विश्वविद्यालय (2015-2017) के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं। आप नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, मसूरी, वन अनुसंधान संस्थान, उत्तराखंड प्रशासन अकादमी, नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय, दून विश्वविद्यालय, उत्तरांचल विश्वविद्यालय और ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। वह गंगटोक में प्रशासनिक संस्थानों में संकाय का दौरा भी करते हैं।

आपने मौसम के पूर्वानुमान के बारे में विश्वसनीयता का निर्माण किया है और जनता के बीच मौसम विज्ञान को लोकप्रिय बनाया है और आपने जून, 2013 की केदारनाथ में हुई भारी बारिश की घटना की भविष्यवाणी की है। आपने नेशनल जियोग्राफिक एंड डिस्कवरी जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय चैनलों पर डाक्यूमेंट्री फिल्मों के निर्माण में भी अपना योगदान दिया है। फसल क्रांति को साक्षात्कार देते समय भी उन्होंने कुछ दिनों के बाद बारिश होने की बात कही थी जो सौ प्रतिशत सही साबित हुई। इसी तरह आनंद शर्मा जी की मौसम आधारित भविष्यवाणी सच होती है। 

आनंद शर्मा जी विभिन्न मौसम विज्ञान केन्द्रों में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। आप वायु मंडल पत्रिका के प्रबंध संपादक भी रह चुके हैं। आप रेडियो, टीवी और समाचार पत्र / पत्रिकाओँ में 7000 से अधिक साक्षात्कार दे चुके हैं। डीडी किसान चैनल पर हर दिन आपके साक्षात्कार दिखाई देते हैं। बीबीसी रेडियो, वॉयस ऑफ अमेरिका और डीडब्ल्यू रेडियो (जर्मन रेडियो) द्वारा उनका साक्षात्कार लिया गया है।

आप कई पेशेवर समाजों जैसे भारतीय मौसम विज्ञान सोसाइटी, इंडियन सोसाइटी फॉर रिमोट सेंसिंग, इंडियन एसोसिएशन ऑफ एग्रो मौसम विज्ञानी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी और इंडिया साइंस राइटर्स एसोसिएशन (आईआरए) के आजीवन सदस्य रहे हैं।

आनंद कुमार शर्मा जी से फसल क्रांति की टीम ने मौसम पूर्वानुमान और कृषि में उसके प्रभाव पर चर्चा की। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंश.....

मौसम विभाग किसानों की किस तरह से सेवा कर रहा है?

हम किसानों के लिए बेहतरीन मौसम पूर्वानुमान लगाने के लिए पूरे भारत में अपना तंत्र स्थापित किए हुए हैं। प्रत्येक राज्य में हमने मौसम केंद्र के अंतर्गत एग्रोमेट एड्वाइजरी यूनिट भी बनाया है। वहां के कर्मचारी कृषि के लिए मौसम पूर्वानुमान देते हैं। इसके लिए हमने कृषि विज्ञान केंद्रो, कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थानों में भी हमने एग्रोमेट फील्ड यूनिट खोल रखी है। जो पूरे भारत में 130 की संख्या में हैं। हम पांच दिन का पूर्वानुमान किसानों को देते हैं। हमारे पूर्वानुमान से किसानों को बहुत फायदा होता है। मान लीजिए कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण मानसून आने वाला होता है तो हम उसकी जानकारी किसानों के दे देते हैं। जिससे उनकी बिजली, पानी, श्रम और समय की बचत हो जाती है। इसी तरह हम मौसम आधारित कृषि सलाह किसानों को देते हैं जिसके कारण किसानों को अनेकों फायदे होते हैं।

किस तरह मौसम पूर्वानुमान किसानों तक पहुंचाते हैं?

हम टीवी, रेडियो, इंटरनेट और अखबारों के द्वारा तो मौसम पूर्वानुमान पहुंचाते ही हैं साथ ही मौसम से जुड़ी  200 शब्दों का संदेश मोबाइल फोन्स के द्वारा भी किसानों तक पहुंचाते हैं। यह सब ग्रामीण मौसम सेवा के अंतर्गत आता है। इसके अलावा भारत कृषि मंत्रालय, भारत सरकार का किसान पोर्टल भी हैं जहां किसान रजिस्ट्रेशन कर मौसम पूर्वानुमान की जानकारी एकत्रित कर सकते हैं। हम देशभर में चार करोड़ से अधिक किसानों तक मौसम पूर्वानुमान के साथ पहुंच रहे हैं। 3-4 वर्षों के दौरान हमारा लक्ष्य अलग-अलग फसलों के लिए मौसम पूर्वानुमान देने के साथ ही 9 करोड़ किसानों तक पहुंचने का है। मौसम पूर्वानुमान से किसान होने वाले नुकसान को कम करके अपनी उत्पादकता को बढ़ाएंगे जिससे हजारों करोड़ का फायदा सीधे तौर पर मिलेगा।

आईएमडी की सेवा के बारे में किसानों से आपको किस प्रकार की प्रतिक्रियाएं मिलती हैं?

वे अब हमारी सटीकता की सराहना कर रहे हैं। हम नियमित रूप से वैज्ञानिक-किसान बातचीत करते हैं। इसलिए आईआईटी, रुड़की में एग्रोमेट फील्ड यूनिट में इस तरह की एक बैठक के दौरान, किसानों में से एक ने बताया कि कैसे उन्होंने हमारे पूर्वानुमान के कारण जो बारिश की चेतावनी दी थी,  सरसों की फसल की कटाई के माध्यम से 1 लाख रुपये की बचत की। 

यह मेरे लिए एक अच्छी प्रतिक्रिया थी क्योंकि इसने पूर्वानुमानों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में मदद की। मैंने वर्षों में बहुत कुछ सीखा है। मुझे पता चल गया है कि मौसम लोगों को कैसे प्रभावित करता है और इसका उपयोग उनके समग्र लाभ के लिए कैसे किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, मुझे पता है कि गेहूं की फसल के लिए, पहले 20-25 दिन सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। अगर मुझे पता है कि कुछ समय बाद बारिश होने वाली है, तो मैं उनसे कहूंगा कि वे सिंचाई ना करें, जिसका मतलब है कि लाखों हेक्टेयर भूमि में सिंचाई बच जाएगी, जिससे भारी मात्रा में धन और भूजल की बचत होगी। एक अच्छा मौसम विशेषज्ञ कृषि खर्च को कम करने, फसल उत्पादन बढ़ाने और पर्यावरण को बचाने में मदद कर सकता है।

मौसम पूर्वानुमान राज्यस्तर पर करते हैं या जिला स्तर पर?

मौसम पूर्वानुमान को हम राज्यस्तर और जिला स्तर पर करते हैं। राज्य का क्षेत्रफल बड़ा होता है जिसमें काफी विविधता होती है। ऐसे में राज्य के मौसम पूर्वानुमान में पूर्णतः सटीकता नहीं होती है। ऐसे में हम सटीकता के लिए जिला स्तर पर भी मौसम पूर्वानुमान देते हैं। ताकि मौसम के आधार पर किसान अपनी तैयारी कर सकें। हमें बताते हुए खुशी हो रही है कि अब हम प्रत्येक जिले के दो-दो ब्लाकों में प्रयोग के तौर पर मौसम पूर्वानुमान देना शुरू कर दिया है। यानि अब कोई भी अपने ब्लाक के मौसम की जानकारी आसानी से ले सकता है। हालांकि अभी इसके सटीकता में कमी है लेकिन हम इस क्षेत्र में बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं।

दिए गये मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और उपयोगिता कितनी होती है?

मौसम पूर्वानुमान मौसम आधारित होता है। जैसे इस बार की सर्दी में मौसम भविष्यवाणी हुई थी कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी होगी और मैदानी इलाकों में वर्षा होगी। यह मौसम पूर्वानुमान बिल्कुल सही हुआ। किसानों को भी आगाह कर दिया गया था। कई जगहों पर 90 प्रतिशत तक सटीकता होती है। उसी के आधार पर किसान भी तैयारी कर लेते हैं। इस तरह इसकी उपयोगिता भी सिद्ध हो जाती है। आपके पत्रिका और चैनल के माध्यम से भी मौसम की जानकारी सही समय पर किसानों को मिल जाती है जिससे उन्हें उसका लाभ मिल जाता है।

किन तकनीकों का प्रयोग कर आप मौसम पूर्वानुमान का पता लगाते हैं?

मौसम पूर्वानुमान के लिए कई तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। इसका पहला और सबसे आसान तकनीक क्लाइमोटोजिकल फॉरकास्ट होता है। क्लाइमोटोजिकल फॉरकास्ट में हम 100 वर्ष के आंकड़ों के हिसाब से पूर्वानुमान लगाते हैं। दूसरा तकनीक स्टेटिस्टिकल फॉरकास्ट होता है जिसमें हम कुछ फार्मूले के तहत गुणा गणित करके मौसम का अनुमान लगाते हैं। इसकी सटीकता कम होती है। हर बार नया फार्मूला बनाना होता है। तीसरा हम सिनोप्टिक मैथड से मौसम पूर्वानुमान करते हैं। इस मैथड में हम देश भर में मौजूद वेदशालाओं के आकंडों को इकट्ठा करते हैं उन्हें चार्ट पर तैयार करके उसका आकलन करते है कि कहां उच्च दाब है, कहां निम्न दाब है,  ट्रफ कहां बना है और रिज कहां है इत्यादि चीजों का अध्ययन करके तब हम उस आधार पर मौसम पूर्वानुमान करते हैं। आजकल हम मिडियम रेंज फॉरकास्ट कम्प्यूटर की मदद से करते हैं। यह न्यूमेरिकल वेदर प्रेडिक्शन कहलाता है। इसके तहत हम 5-7 दिन के मौसम का पूर्वानुमान करते हैं। इसको समान्य भाषा में मशीन मैथड कहते हैं। लेकिन कम्प्यूटर द्वारा किए गये आकलन में हम अपने अनुभव के आधार पर वेल्यू एडिशन करके उसे किसानों तक पहुंचाते है कि आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहेगा। इसको मैन मशीन मैथड कहते हैं। मैन मशीन मैथड से मौसम पूर्वानुमान में सटीकता बढ़ जाती है। किसानों की मांग पर हमने एक्सटेंडेड फॉरकास्ट भी करना शुरू किया है। इसके तहत किसान 4 सप्ताह पूर्व का मौसम पूर्वानुमान देख सकते हैं। हांलाकि दो सप्ताह पूर्व का पूर्वानुमान ज्यादा उपयोगी होता है। 


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