किसानों की समस्या का समाधान ही हमारी प्राथमिकता- राजू कपूर

एफएमसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने भारत में चार दशकों से खुद को कृषि बाजार का एक लीडर बनाया है। बेहतरीन गुणवत्ता वाले उत्पाद और किसानों की सेवा करने की भावना ने एफएमसी को शीर्ष पर स्थापित किया है। भारत एफएमसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के लिए प्रमुख बाजारों में से एक है जहां कंपनी ने महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए के बड़ा काम किया है।

एफएमसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एफएमसी कारपोरेशेन का एक हिस्सा है जो भारत में वर्ष 1973 से काम कर रहा है। कंपनी की पहुंच भारत के दूर दराज के गांव तक है, जहां के किसान एफएमसी के उत्पादों से न केवल अपनी उपज बढ़ा रहे हैं, बल्कि अपनी आय भी दोगुनी करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

भारत में, एफएमसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की दो व्यावसायिक इकाइयों में परिचालन होता है: एफएमसी एग्री सोल्युशन और एफएमसी लिथियम। तेलंगाना के पाटनचेरु में गुजरात के पनोली में इसकी विनिर्माण साइटें हैं।  

एफएमसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बारे में विस्तार से जानने के लिए फसल क्रांति की टीम ने कंपनी के डारेक्टर- इंडस्ट्री एंड पब्लिक अफेयर्स, राजू कपूर से बातचीत की। अपनी बातचीत में राजू कपूर ने कंपनी के विषय में बहुत सी बातें सांझा की। जिसके कुछ अंश प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

बातचीत के दौरान राजू कपूर ने बताया कि फसल सुरक्षा के क्षेत्र में एफएमसी विश्व की शीर्ष पांच कंपनियों में से एक है। इस कंपनी के उत्पादों की मांग किसानों के बीच बड़े पैमाने पर की जाती है। हमारे कुछ उत्पाद जैसे- कोराजन, फर्टेरा और वैनेबिया इत्यादि की साख भी किसानों के बीच काफी है। किसान हमारे उत्पादों पर बहुत विश्वास करते हैं। यही कारण है कि हम किसानों के लिए बेहतरीन उत्पादों का निर्माण करते हैं।

भारत में भी हमारी कंपनी अग्रणी स्थान रखती है। दशकों की मेहनत के बाद हम अच्छे गुणवत्ता वाले उत्पादों को बनाते हैं ताकि किसान भाइयों को उनकी जरूरत के अनुसार उत्पाद मिले। हम किसानों की समस्या को उनके खेत से लाकर अपनी आरएंडडी प्रयोगशाला में उनका परिक्षण करते है। लम्बे शोध के बाद हम किसानों की समस्या को समाधान में उत्पाद के रूप में बदलकर उनके खेत में प्रदान करते हैं। हम किसानों की समस्या का समाधान ही हमारी प्राथमिकता है।   

कोरोनावायरस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह संकट काल का समय है। पूरा विश्व कोरोनावायरस से जूझ रहा है। इस वायरस से लाखों लोगों की जान ले ली है। कहा जा रहा है कि यह एक या दो माह में जाने वाली बीमारी नहीं है बल्कि यह लम्बे समय तक रहने वाली बीमारी है। इसलिए हमें इसके साथ जीने की आदत डालनी होगी, लेकिन मैं आप सबसे यह प्रार्थना करता हूं कि ये समय कोरोना से बचने का है इसलिए आप लोग इससे बच कर रहें। इस समय आप लोग बाहर निकलने से बचें। कई सेक्टर को कोराना ने पूरी तरह से चौपट कर दिया है। ये सेक्टर कब तक फिर से पुराने तरह से काम करेंगी इसकी अभी कोई संभावना नहीं है।

आने वाले समय में अगली सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को लेकर होगी। देखना यह होगा कि सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए कैसे प्रयास करती है। हालांकि मैं भारत सरकार के प्रति अपना आभार प्रकट करता हूं क्योंकि भारत सरकार ने इस लॉकडाउन के दौरान कृषि क्षेत्र में किसानों को काम करने की अनुमति प्रदान की है। सरकार ने अभी पूरी तरह से कृषि संबंधित कंपनियों को काम करने की अपनी सहमति नहीं दी है, लेकिन मुझे विश्वास है कि कुछ दिनों के बाद कुछ शर्तों के साथ कृषि संबंधित कंपनियों को भी काम करने की अनुमति प्रदान की जाएगी। कोरोना के चलते सप्लाई चेन काफी प्रभावित हुआ है। अभी भी लगभग 2 लाख ट्रक सड़कों पर खड़े है। हालांकि सरकार इसके लिए प्रयास कर रही है कि जरूरत का सामान सभी लोगों तक पहुंचे।

कृषि क्षेत्र से ही अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद दिख रही है। नीति आयोग भी दावा कर रहा है कि इस वर्ष कृषि अर्थव्यवस्था में 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होगी। इससे फायदा यह होगा कि कृषि का जीडीपी काफी ऊपर हो जाएगा। अभी तक हम यह कहते थे कि भारत की लगभग 50 करोड़ आबादी कृषि पर निर्भर है लेकिन अर्थवयवस्था में उनका योगदान सिर्फ 14 प्रतिशत ही है, अब यह अनुपात बढ़ जाएगा। कृषि क्षेत्र में कुछ सुखद समाचार भी हैं जैसे इस वर्ष दलहन का बंपर उत्पादन हुआ है और उनकी खरीद भी बड़े पैमाने पर की जा रही है। गेहूं की ज्यादातर कटाई हो चुकी है। उम्मीद है कि एमएसपी पर किसानों से गेहूं खरीदने का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। अच्छी खबर ये भी है कि इस वर्ष मानसून अच्छा रहने वाला है। इसके उलट, फल सब्जी, मत्स्य, मीट, पोल्ट्री जैसे व्यवसाय वाले किसानों को जरूर घाटा हुआ है। हम सबने खुद राइस एक्पोर्ट में झटका खाया है।

इस समय खेती में श्रमशक्ति का भी अभाव देखने को मिल रहा है। सभी शहरों से मजदूर अपने-अपने गांवों की ओर पलान कर रहे हैं। इसिलिए श्रमिकों की कमी से हमें गुजरना होगा।

कंपनियों को भी अब नये तरीके से काम करना होगा। अभी भी बहुत सी कंपनियां डिजिटली काम कर रही है। आने वाले समय में डिजिटली और भी विकास होने वाला है। हम भी बिना खेत में गये ही डिजिटली किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए काम कर रहे हैं। किसानों को भी अब अपने मोबाइल को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना होगा और उसको नई-नई चीजें सीखनी होगी। आप देखें तो एफएमसी के फेसबुक पेज पर रोज किसानों को विभिन्न फसलों को उगाने की जानकारी और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों को इसका फायदा उठाना चाहिए। हमारी तरह और भी सरकारी और गैर सरकारी कंपनियां इस तरह की जानकारी और ट्रेनिंग दे रही है। मैं किसानों से यह कहना चाहता हूं कि आपको अब खेत में बहुत कम लोग सिखाने के लिए आएंगे। आपको खुद से जागरूक होना पड़ेगा और डिजिटली ही सीखना पड़ेगा। मैं डीलरों से भी अनुरोध करना चाहूंगा कि आप भी नई-नई चीजों को सीखें और डिजिटल माध्यम से किसानों को सिखाएं। आने वाले समय में वही कंपनी और वही किसान सफल होंगे जो डिजिटल माध्यम से मजबूत होंगे।  

मैं किसानों से यह भी अनुरोध करना चाहूंगा कि आप सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए खेती का काम करें। कोई भी उत्पाद प्रयोग करने से पहले आप उसकी जांच करें और तभी खरीदें। मैं तो यही कहूंगा कि किसान भाइयों को चाहिए की वो अच्छे ब्राण्ड को अच्छे दुकान से ही खरीदे ताकि उन्हें असली उत्पाद मिल सके।   

More on this section