समय का दृष्टिकोण है एग्रो व्हिजन : डॉ. सी.डी.मायी

महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित कृषि मेले एग्रो व्हिजन में फसल क्रांति के वरिष्ठ संपादक डॉ. रविंदर तेवतिया ने एग्रो विज़न के सलाहकार परिषद के अध्यक्ष डॉ. सी.डी.मायी से उनके विचारों को जानने की कोशिश की।

डॉ. सी.डी. मायी ने कहा कि एग्रो व्हिजन की शुरुआत का एकमात्र मकसद किसानों को ज्यादा से ज्यादा उस तकनीकी के बारे में बताना है, जिससे वो अपनी आय को अधिक कर सकें। अगर हम विदर्भ की बात करें तो वहां पर बारानी खेती का मुद्दा है। बारानी खेती से हमारा तात्पर्य उस जगह से है जहां कृषि, वर्षा पर आधारित होती है। विदर्भ में सिंचाई की समस्या बहुत है लेकिन किसान वहां पर कपास, सोयाबीन और अरहर लगाते हैं। बारानी खेती में कुछ साल बहुत अच्छे आते है तो कुछ साल बहुत बुरे भी आते हैं। इन फसलों के खराब हो जाने से या उत्पादन न होने से किसान आत्महत्या करने के लिए विवश हो जाते थे।

इस विषय पर नितिन गडकरी जी ने अथक प्रयास किए। उसके बाद इन सभी कारणों को हल करने के लिए हमने एग्रो व्हिजन की स्थापना की। इसकी स्थापना के पीछे सबसे बड़ा कारण यही था कि किसान भाई खेती के अलावा क्या ऐसा करें जिससे कि उनकी आय को बढाया जा सके।

एग्रो व्हिजन को हमने मुख्यतः तीन भागों में बांटा है। सबसे पहले आता है प्रदर्शनी। आपने देखा है एग्रो व्हिजन में हम ज्यादा से ज्यादा कम्पनी के स्टाल लगवाते है, जिससे कि किसान भाई नई तकनीकियों को देख सके और उससे होने वाले लाभ की विस्तृत जानकारी ले सके।

दूसरा मुख्य भाग कृषि कार्यशाला है। एग्रो व्हिजन में हम 22 अलग अलग विषयों पर कृषि कार्यशाला का आयोजन करते हैं। इस कार्यशाला में हम कृषि विशेषज्ञों और सफल किसान भाइयों को बुलाते है। सभी लोग सम्बंधित क्षेत्र की सारी जानकारी लेते हैं।

हमने देखा कि डेयरी व्यवसाय को करके भी किसान भाई अपनी आय बढ़ा सकते हैं लेकिन यहां डेयरी के केंद्र भी ज्यादा नहीं थे। इसलिए हमने डेयरी कांफ्रेंस का आयोजन किया। अब जिन किसान भाइयों को डेयरी से सम्बंधित कोई भी समस्या होती है तो यहां मौजूद विशेषज्ञ उनका समाधान कर देते हैं।

किसानों की मूल समस्या का निवारण एग्रो व्हिजन है और इस बात को किसान भाई समझ गए हैं। यही कारण है कि तीन दिवसीय इस मेले में 5 लाख किसान सम्मिलित होते हैं और अपना ज्ञानवर्धन करके जाते हैं।

इस बार हमने सोचा है कि किसान भाइयों के लिए एक सेंटर बनायें जिसमे उनके लिए हर महीने कृषि कार्यशाला का आयोजन किया जाए। इससे ये होगा कि हम उन्हें सिद्धान्तों के साथ व्यवहारिक रूप से चीजें दिखा सकते हैं। जिससे किसान ज्यादा से ज्यादा कृषि की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उन्नत कृषि कर सकते हैं।

बीटी कपास के बारे में पूछने पर डॉ. सी.डी.मायी ने कहा हमें यहां पर लगभग 15 साल हो गए हैं। बीटी कपास की खेती करते हुए और इन सालों में उत्पादन की दृष्टि से यह बेहद अच्छा है परन्तु पिछले साल कपास में पिंक बोलवोर्म और वाइट फ्लाई की कुछ समस्या आई है। हम केन्द्रीय कपास संस्थान अनुसधान में कपास की ऐसी किस्म विकसित कर रहे हैं जिससे हम इन सभी समस्याओं से निजात पा सकेंगे। जिसके फलस्वरूप कपास किसानों को इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सकेगा।

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