Fasal Krati

राष्ट्रीय बीज निगम किसानों की लागत कम करने के लिए प्रयासरतः वी. के. गौड़

Last Updated: February 21, 2019 (03:27 IST)

नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन (एनएससी) मिनी रत्न श्रेणी की कंपनियों में से एक है जो पूर्णत: भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। एनएससी को मार्च 1963  में स्थापित किया गया था ताकि उन्तशील व प्रमाणित बीजों का उत्पादन किया जा सके। वर्तमान में, यह अपने पंजीकृत बीज उत्पादकों द्वारा 60 फसलों की लगभग 680 किस्मों के प्रमाणित बीज का उत्पादन कर रही है। पूरे देश में करीब 8000 पंजीकृत बीज उत्पादक हैं जो विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में बीज उत्पादन कर रहे हैं।

फसल क्रांति की टीम ने एनएससी के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक वी.के. गौड़ से एनएससी के क्रियाकलापों के बारे में बातचीत की। उन्होंने एनएससी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि हम खाद्यान्नों के अलावा तिलहन, दलहन, सब्जियों सहित चारे के बीजों का भी उत्पादन कर रहे हैं। किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एनएससी ने सख्त गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया स्थापित की है। एनएससी ने बीज की गुणवत्ता की जांच करने के लिए 5 गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं। उन्होंने एनएससी के बारे में और कुछ भी बताया जिसके कुछ अंश नीचे प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय बीज निगम मुख्यतः क्या काम करता है?

राष्ट्रीय बीज निगम सरकार की विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एनएनसी नये प्रजाति के बीजों को किसानों तक पहुंचाता है। यह राज्य बीज निगमों सहित बीज उत्पादक एजेंसियों को बीजों के उत्पादन में लगे कर्मियों के प्रशिक्षण को तकनीकी सहायता प्रदान करता है। एनएससी निजी क्षेत्र में विभिन्न राज्यों में प्रसंस्करण संयंत्रों और भंडारण गोदामों की स्थापना के लिए, बुनियादी सुविधाओं की स्थापना के लिए एवं केंद्रीय क्षेत्र योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है। एनएससी दुनिया भर में विशेष रूप से सार्क और अफ्रीकी देशों में बीज का निर्यात भी करता है। निगम द्वारा बनाए गए बीज बैंक भारत में बड़ी मात्रा में है जो विभिन्न फसलों / किस्मों के बीज को बाढ़, सूखा जैसे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पैदा होने वाली मांग को पूरा करने के लिए होती हैं। एनएससी उत्तर-पूर्व राज्यों जैसे देश के आंतरिक हिस्सों में किसानों के गुणवत्ता वाले बीज की मांग को पूरा करने के लिए देखभाल करती है और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी पूर्ति करती है।

आने वाले खरीफ सीजन के लिए आप किस तरह की तैयारी कर रहे हैं।

आने वाले खरीफ सीजन के लिए के लिए हम सीड प्रोसेसिंग कर रहे हैं। हम किसानों को धान और हाइब्रिड धान उपलब्ध कराएंगे। इस बार हम किसानों के लिए फीलीपिंस से नया धान लाए हैं जो बहुत अच्छी उपज देगा। हम हाइब्रिड मक्का की 2-3 किस्मों का भी उत्पादन कर रहे हैं जिसकी उपज बहुत अच्छी है। यह मक्का 10 टन प्रति हैक्टेयर तक की पैदावार देता है। दलहन में हम मूंग और उड़द का उत्पादन कर रहे हैं। छोटी अवधि में तैयार होने वाली मूंग का उत्पादन हम कर रहे हैं। दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए हम अच्छी किस्म की चारे के बीच बाजार में ला रहे हैं जो कम कीमत पर किसानों को मिल रहा है। इस चारे को खिलाने से पशुओं में दूध देने की क्षमता बढ़ जाती है। गर्मियों में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हम चारा बीज उपलब्ध करा रहे हैं।  

बीज कोटिंग क्या है और यह किस तरह काम करता है?

बीज कोटिंग के तहत बीजों को रसायनों में कोटिंग किया जाता है। इससे यह फायदा होता है कि बीजों के जमने के समय इसे जरूरी पोषक तत्व मिल जाता है जिससे फसल स्वस्थ होती है और पैदावार में वृद्धि होती है। हम बीजों को सल्फर, जिंक, आयरन इत्यादि की कोटिंग कर रहे हैं। इसके अलावा हम जैविक उर्वरकों जैसे माइकोराजा, अजिटोबैक्टर, फास्फोरस इत्यादि की कोटिंग भी बीजों के ऊपर कर रहे हैं।  बिभिन्न प्रकार के दलहनी बीजों में राइजोबियम की कोटिंग कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि बीजों के साथ-साथ उर्वरक व पोषक तत्वों की बीजों पर कोटिंग हो ताकि किसानों की लागत में कमी हो और पैदावार में वृद्धि हो।   

हाई वैल्यू व लो वैल्यू क्रॉप के बीजोत्पादन के लिए आप क्या कर रहे हैं।

प्राइवेट सेक्टर की जितनी भी कंपनियां हैं वे सभी हाई वैल्यू व लो वैल्यू क्रॉप पर फोकस कर रही हैं। अब एनएससी भी हाई वैल्यू व लो वैल्यू क्रॉप में काम कर रही है। इसके अंतर्गत हमने सब्जी के विभिन्न बीजों को ‘फार्म सोना’ के नाम से बाजार में उतारा है। हम धान, मक्का का भी हाइब्रिड ला रहे हैं। हमारी इच्छा है कि प्राइवेट कंपनियां जिन बीजों को उच्च मूल्य पर बेचती हैं हम उसी बीज को कम दाम में किसानों को दें। ऐसा होने से प्राइवेट कंपनियों को भी अपने बीजों के दाम करने पड़ेंगे जिससे किसानों को लाभ मिलेगा। इस तरह से हम किसानों की लागत को कम कर सकते हैं।    

हरी खाद के उपलब्धता हेतु आप क्या कर रहे हैं और किस फसल बीज का उत्पादन कर रहे हैं।

हरी खाद की फसलों का बाजार में हमेशा उतार-चढ़ाव होता रहता है जिसके कारण इसकी मांग में कमी होती है। ढैंचा की ही बात करें तो कभी यह 100 रूपये किलो बिकता है तो कभी सीधे 30 रूपये हो जाता है। कुछ लोग ही इसका उत्पादन करवाते हैं। अगर इसका बीज बच जाता है तो कोई काम का नहीं होता है। हालांकि इसके लिए एडवांस प्लानिंग करनी होगी। अगर इसके लिए टाइ-अप हो जाए जैसा उत्तर प्रदेश के साथ हुआ है तो काम हो सकता है। अभी उत्तर प्रदेश ने 15 हजार क्विंटल ढैंचा के बीज के लिए टाई-अप हमारे साथ किया है। प्राइवेट कंपनियां इसको 300 रूपये किलो में बेच रही है, लेकिन हम अपने हाइब्रिड को 150 के नीचे ही बेचेंगे जिससे किसानों को काफी लाभ होगा। अभी हम विभिन्न किस्मों को डिजिटल पैकेजिंग करके बाजार में उतार रहे हैं।   

क्या 2022 तक किसानों की दोगुनी आय करने के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है?

हां, इस लक्ष्य को 2022 ही नहीं बल्कि उसके पहले ही पूरा किया जा सकता है, बशर्ते सभी सेक्टर एक साथ मिलकर प्रयास करें। हमें यह देखना होगा कि हम संसाधनों की लागत को कैसे कम कर सकते हैं और उत्पादन के मूल्यों को कैसे बढ़ा सकते हैं। हमें अत्यधिक खादों कीटनाशकों के प्रयोग से बचना चाहिए व मिट्टी परिक्षण उपरान्त ही इन सब संसाधनों का उचित प्रयोग करना चाहिए जिससे हमारी इनपुट लागत कम हो। इसके साथ ही किसानों को पशुपालन, मधुमक्खीपालन, कुक्कुटपालन, मत्स्यपालन और बागवानी भी करनी चाहिए जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।

सब्जी बीज के क्षेत्र में वर्तमान में आपकी क्या स्थिति है?

पिछले तीन साल में हमने सब्जी के बीजों में भी अच्छा काम किया है। इस क्षेत्र में हमारा लगभग 70 करोड़ का टर्नओवर हो चुका है। हालांकि सब्जियों के बीज को विकसित करना थोड़ा कठिन काम है लेकिन हम इसे कर रहे हैं। हम सब्जियों के दाम को स्थिर करने व किसानों को बेहतर दाम दिलाने का भी प्रयास करेंगे। हमारा लक्ष्य सब्जी बीजों में कम से कम 150 करोड़ का टर्नओवर करना है। हम मटर व आलू के बीज पर भी खास ध्यान दे रहे हैं।


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