100 एकड़ की पैदावार 1 एकड़ में ले सकते हैं किसान: प्रतीक शर्मा

देश में लगातार कम होती कृषि योग्य भूमि एक चिंता का विषय है। यदि इसी तरह भूमि खत्म होती रही तो भविष्य में खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो जाएगा और किसानों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इस स्थिति से निपटने के लिए नई कृषि तकनीकों के इस्तेमाल की आवश्यकता है। ए एस एग्री एंड एक्वा एलएलपी एक ऐसी कंपनी है जो किसानों को इस समस्या से उबारने के लिए कृषि तकनीकी उपलब्ध करा रही है। कंपनी की दावा है कि इस तकनीकी से किसानों को कम कृषि भूमि में 10 गुना अधिक उत्पादन मिल रहा है। इसी तकनीकी की ज्यादा जानकारी के लिए फसल क्रांति की टीम ने कंपनी के सीईओ प्रतीक शर्मा से बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ मुख्य अंश..

ए एस एग्री एंड एक्वा एलएलपी की शुरुआत कैसे हुई?

कंपनी के प्रबंध निदेशक और अन्वेषक प्रशांत जड़े के द्वारा कंपनी की शुरुआत 2 साल पहले हुई। शुरुआत से पहले तीन सालों तक शोध एवं अनुसंधान का कार्य चला उसके बाद कंपनी की स्थापना की गई। कंपनी को शुरू करने का उद्देश्य एक ऐसी तकनीक को किसानों तक पहुंचाना है जिसके जरिए कम होती कृषि भूमि और कम कृषि उत्पादन की समस्या को निपटाया जा सके। हमने ऐसी ही कृषि तकनीक विकसित किया जिसके द्वारा किसान कम भूमि में ज्यादा उत्पादन ले सकते हैं। इस तकनीकी को हम अब किसानों तक पहुंचा रहे हैं।

कंपनी किस क्षेत्र में काम कर रही है?

कंपनी मुख्य रूप से दो क्षेत्रों, वर्टीकल फार्मिंग और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में काम कर रही है। इन दोनों क्षेत्रों में हम अत्याधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचा रहे हैं ताकी किसान कम कृषि भूमि में अधिक उत्पादन ले सकें। इन दो तकनीकों को हम तेजी से प्रमोट कर रहे हैं।

दोनों तकनीकों को विस्तार से बताएं।

वर्टीकल फार्मिंग एक ऐसी नई तकनीक है जिसका इस्तेमाल करके किसान कम लागत और कम भूमि में अधिक फसल उत्पादन ले सकते हैं। किसान इस तकनीक के जरिए एक एकड़ भूमि से 100 एकड़ कृषि भूमि जितनी पैदावार ले सकते हैं। इसको हम सॉयल बेस्ड (मिट्टी पर आधारित) वर्टीकल फार्मिंग कहते हैं। इसमें कम लागत लगती है। जहां पर एक एकड़ में 15 लाख बीज को लगाया जाता है वहीं हम 6 लाख बीज लगाते हैं और उनकी अच्छी देखरेख करते हैं। यह केमिकल मुक्त खेती होती है इसमें किसी तरीके के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। ख़ास बात यह है कि इस वर्टीकल फार्मिंग को पॉलीहाउस में किया जाता है। इसमें टपक सिंचाई प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे 80 प्रतिशत तक पानी बचत होती है। ये मान लीजिये की 100 एकड़ की पैदावार 1 एकड़ जमीन में मिल जाती है और इसमें अधिक कर्मचारियों की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसकी देखभाल के लिए मात्र दो व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। जिन किसानों के पास कम भूमि है ऐसे किसानों के लिए यह बहुत ही अच्छी तकनीकी है। ऐसे किसान इस तकनीकी के जरिए कम भूमि में कई गुना अधिक पैदावार लेकर अधिक आय कमा सकते हैं।

बायोफ्लोक तकनीक के माध्यम से बिना तालाब के मछलीपालन किया जा सकता है। इस तकनीकी में मछलीपालन करने के लिए कृत्रिम तालाब बनाया जाता है। जिसमें आरओ का पानी छोड़ा जाता है। उसके बाद उसी में मछली का बीज छोड़ा जाता है। इसकी ख़ास बात यह है कि कम जगह में या फिर घर पर भी इस तकनीकी के जरिए मछलीपालन किया जा सकता है। इससे किसानों की आय में काफी इजाफा होता है। यदि किसान चाहे तो वर्टीकल फार्मिंग और बायोफ्लोक दोनों को एक साथ भी कर सकता है।

वर्टीकल फार्मिंग तकनीक के माध्यम से कौन-कौन सी फसलें उगाई जा सकती हैं?

इस तकनीक के माध्यम से दलहन, सब्जियां आदि फसलें उगाई जा सकती है क्योंकि इसमें मल्टीलेयर विधि से फसलों की बुवाई की जा सकती है। इस तकनीक के माध्यम से हमने कई फसलें उगाई है और इसमें सबसे अच्छी और कमर्शियल क्रॉप हल्दी है। इस तकनीक से हल्दी बुवाई करने पर 1 एकड़ में 100 एकड़ के बराबर की हल्दी पैदा होती है।

आपके हिसाब से खेती में सबसे बड़ी समस्या क्या है ?

हमारे हिसाब से खेती में सबसे बड़ी समस्या जलवायु है। भारत की अभी भी ज्यादातर कृषि वर्षा पर ही निर्भर है। कभी निम्न वर्षा के कारण तो कभी ज्यादा वर्षा के कारण फसलें प्रभावित होती हैं। तूफ़ान और तेज हवाओं के कारण भी फसल बर्बाद हो जाती है। हमारी कंपनी ने इन सब समस्याओं पर नियंत्रण कर लिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तकनीक से हम किसानों खेती कराते हैं उसमे वर्षा या तुफान के कारण कोई नुकसान नहीं होता है। पॉलीहाउस में फसल के ऊपर न तो बारिश का कोई असर होता है और न ही तेज हवाओं से कोई नुकसान होता है बल्कि बारिश के पानी को स्टोर कर लिया जाता है इसलिए इन समस्याओं से आसानी से निपटा जा सकता है।

इन तकनीकों को किसानों तक कैसे पहुंचा रहे हैं?

किसानों तक इन तकनीकों को पहुंचाने के लिए हम विभिन्न माध्यमों का प्रयोग कर रहे हैं। हम देश कई राज्यों में काम कर रहे हैं। अभी हम महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्णाटक, आंध्रप्रदेश, केरल, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा राज्य में काम कर रहे हैं। इसी के साथ आने वाले दिनों में हम अन्य राज्यों में तेजी से अपना काम बढ़ा रहे हैं और किसानों को इस तकनीक से जोड़ रहे हैं।   

किसान कैसे आपके साथ जुड़ सकते है?

किसान आसानी से हमारे साथ जुड़ सकते हैं। इसके लिए किसानों को अपनी जानकारी हमें देनी होगी। उसके बाद हम किसान की कृषि भूमि का मुआयना करेंगे और उन्हें इस विधि की सभी  प्रक्रिया बताएंगे। किसान से हम उसकी भूमि कुछ समय के लिए लेते हैं। जिसमें हम एक निश्चित समय के लिए अपना प्रोजेक्ट लगाते है। कृषि भूमि के हिसाब से निवेश होता है। यह निवेश 2 लाख रूपये से लेकर 2 करोड़ रूपये तक होता है। प्रोजेक्ट लगने के बाद किसान को फसल उत्पादन बेचने की भी समस्या नहीं रहती हम स्वयं किसान से उत्पादित फसल को खरीदते हैं।

फसल क्रांति के माध्यम से पाठक किसानों को क्या कहना चाहेंगे?

मैं फसल क्रांति के माध्यम और अपनी कंपनी की ओर से किसान भाईयों से यही कहना चाहूंगा कि वे खेती की आधुनिक तकनीकों को अपनाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा फसल उत्पादन लिया जा सके। मैं किसान भाईयों से अपील करता हूं कि वे हमारे साथ जुड़े, हम उनकी आय और उत्पादन दोनों को भरपूर बढाकर देंगे।

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