नियंत्रण उर्वरक प्रणाली से बढ़ेगा किसानों का उत्पादन- दिलीप सिंह

कोरोना ने जिस तरीके से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेकर दुनियाभर को आर्थिक और सामाजिक दोनों ही तरीके से भारी नुकसान पहुँचाया है वह काफी कठिनाई भरा है। उद्योग जगत ने भी भारी नुकसान उठाया है। भारतीय कृषि क्षेत्र पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है, जिससे कृषि उद्योग में कृषि उत्पादन से लेकर निर्माण इकाईयों तक भारी प्रभाव पड़ा है। कृषि उर्वरक क्षेत्र पर भी इसका भारी प्रभाव पड़ा है क्योंकि कृषि उर्वरक की सप्लाई लगभग पूरे देश में किसानों पहुँचती है लेकिन लॉकडाउन के चलते जिस तरीके से उर्वरक क्षेत्र पर प्रभाव पड़ा है उसके विषय में बता रहे हैं कृषि उर्वरक बनाने वाली जानी मानी कंपनी आदित्य बिरला ग्रुप (इंडोगल्फ फर्टीलाइजर लिमिटेड) के चीफ मार्केटिंग दिलीप सिंह। आईये जानते है उन्होंने क्या कहा। 

अपने विषय में कुछ बताए?

मुझे कृषि क्षेत्र में काम करते हुए लगभग 25 साल हो गए। आदित्य बिरला ग्रुप से पहले मैं कई कृषि कंपनियों में कार्य कर चुका हूं। कृषि क्षेत्र में काम करते हुए अच्छा अनुभव हो चुका है। यदि इण्डोगल्फ फ़र्टिलाइज़र के बारे में बात करूं तो यह कंपनी आदित्य बिरला ग्रुप की कंपनी है। हमारी कंपनी मुख्य रूप से कृषि उर्वरक के क्षेत्र में काम करती है। यह कंपनी मुख्य रूप से नीम कोटेड यूरिया, कृषि रसायन आदि उत्पाद का निर्माण करती है।  

कोविड-19 का कृषि उर्वरक क्षेत्र पर प्रभाव पड़ा है ? 

इस समय कोरोना महामारी ने पूरे देश को प्रभावित किया है। इस महामारी से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित हुई है। दुनियाभर में जान और माल का भारी नुकसान हुआ है। भारतीय कृषि क्षेत्र पर भी इसका  काफी प्रभाव पड़ा है। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते उर्वरक उद्योग को सप्लाई में काफी दिक्कते हुई हैं। इससे उर्वरकों की सप्लाई में कई तरीके से परेशानियों का सामना करना पड़ा। उर्वरकों के लदान के बाद कई दिनों में उत्पाद का स्टॉक लोकेशन पर पहुंचा है। चूँकि लॉकडाउन में यह एक समस्या रही लेकिन बाद में सरकार ने कृषि गतिविधियों को लॉकडाउन नियमों से मुक्त कर दिया जिससे सप्लाई दुरुस्त हुई है। इसके लिए मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा, जिस तरीके से उन्होंने यह सराहनीय काम किया है। 

कोविड-19 के दौरान काम करने के तरीकों में कैसे बदलाव हुए?

कोविड-19 ने हमे बहुत कुछ सीखा दिया यह एक ऐसा समय है जिसने काम करने का तरीका ही बदल कर रख दिया। जिस समय सरकार ने कृषि गतिविधियों को लॉकडाउन से मुक्त कर दिया था उस समय उर्वरक उद्योग का नाम नहीं लिया इसलिए उस समय थोड़ा असमंजस की स्थिति उत्पन हो गयी थी। इस स्थिति को स्पष्ट होने में थोड़ा समय 10 से 12 दिनों के बाद स्टॉक डिस्पैच हुए। उर्वरक उद्योग के लिए यह कुछ समय के लिए काफी चुनौतीपूर्ण समय था। उर्वरक को किसानों तक पहुंचाने के लिए कई तरीके की समस्याओं का सामना करना पड़ा जिसके चलते सप्लाई चैन में बदलाव हुए और किसानों तक उर्वरक पहुँचाया गया। 

कोरोना वायरस के चलते प्रवासी मजदूरों के पलायन पर आपकी क्या राय है?

जिस तरीके से कोरोना महामारी के चलते एकदम से उद्योग और कल कारखाने बंद हो गए ऊपर से कोरोना वायरस के डर के चलते मजदूरों ने पलायन करना शुरू किया। उसके बाद जो मजदूर फसे हुए थे और उनके पास खाने का सामान और पैसे सब ख़तम हो चुके थे जिससे उनको परेशानी का सामना करना पड़ा। इसलिए बड़े स्तर पर मजदूरों ने शहरी क्षेत्रों से पलायन किया कोरोना के साथ ही यह एक दूसरी समस्या खड़ी हो गयी, क्योंकि सरकार के आदेश के बाद जिन उत्पादन इकाईयों ने दोबारा से उत्पादन शुरू किया उनमे कामगारों और मजदूरों की समस्या होने लगी। इससे उर्वरक क्षेत्र को प्रभावित किया। क्योंकि मजदूरों के बिना उत्पादन में भी परेशानी आने लगी। इसलिए मजदूरों के पलायन से उर्वरक उद्योग पर भी काफी प्रभाव पड़ा है।  

किसानों के लिए आप क्या कहना चाहेंगे?

अपने किसान साथियों से मैं कहना चाहूंगा की वे कृषि कार्य करते समय सावधानी बरतें। कृषि उपकरणों को अच्छे से धोकर इस्तेमाल करें और सोशल डिस्टैन्सिंग का पालन करें क्योंकि कोरोना से लड़ने का यही सबसे बड़ा हथियार है। इसके अलावा मैं अपने किसान भाईयो से कहना चाहूंगा की अब खरीफ सीजन की भी शुरुआत हो रही है, तो किसान सही मात्रा में उर्वरको का इस्तेमाल करें और नियंत्रण खाद प्रणाली का उपयोग करें। इससे निश्चित ही किसानों की फसल पैदावार बढ़ेगी जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। किसान नकली उर्वरक खरीदने से बचे और अच्छे कृषि उर्वरकों को ही ख़रीदे। 

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