लखनऊ की महिला किसान को मिला अकादमी अभिनव किसान पुरस्कार

लखनऊ की महिला किसानों ने आंधी और तेज हवा से गिरे आम के कच्चे फलों को पारंपरिक रूप से खटाई बनाकर  धन उपार्जन करने का नया तरीका ईजात किया है। महिला किसानो को मूल्य संवर्धन द्वारा ज्यादा आय दिलाने एवं बिचौलियों से बचने के लिए,फार्मर फ़र्स्ट परियोजना के अंतर्गत केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान,रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों ने 30 महिलायों के समूह को कच्चे आम के प्रसंस्करण हेतु प्रशिक्षित किया।  जिसमें महिलायों को आँधी के कारण गिरे हुये आम के कच्चे फलों से अमचूर बनाने की उन्नत तकनीकी बताई गई। जिससे प्रेरित होकर महिला किसान नई विधि से अमचूर बनाने लगी तथा इसको शहरी क्षेत्रों में अच्छे दाम पर बेच रही हैं। 

इसी क्रम में मोहम्मद नगर तालुकेदारी गाँव की महिला किसान स्वेता मौर्य को हैदराबाद स्थित आई॰सी॰ए॰आर॰-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी द्वारा अभिनव किसान पुरस्कार के लिए चुना गया। यह पुरस्कार आई॰सी॰ए॰आर॰ के महानिदेशक डॉ त्रिलोचन महापात्र के कर कमलों द्वारा दिया गया। इस पुरस्कार के लिए देश भर से केवल आठ किसानों का चयन किया गया जिसमें से एक स्वेता मौर्य को मिला है। स्वेता मौर्या अमचूर के अलावा आम पना एवं विभिन्न प्रकार के आचार भी बनाती हैं।

24 वर्षीया श्वेता मौर्या इससे बेहद उत्साहित हैं उन्होंने कहा कि अमचूर, आम पन्ना, अचार एवं अमावट के लिए लोग उनसे संपर्क कर रहे है उन्हें हैदराबाद एवं मध्यप्रदेश से आर्डर मिले हैं ।  वह कहती है की केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान क वैज्ञानिक डॉ पवन गुर्जर के द्वारा दिए गए प्रशिक्षण और निदेशक के सहयोग से वह यह कार्य सफलता पूर्वक कर पायी। परियोजना के अन्वेषक डॉ मनीष मिश्रा बताते है की  जिन महिलाओ को इस तकनीक से जोड़ा गया उन्हें पारम्परिक विधि से कार्य करने वाली महिलाओ की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक आय प्राप्त हुई । मूल्य संवर्धन के अतिरिक्त संस्थान बहुत सी  बागवानी संबंधित प्रौद्योगिकी में उद्यमिता विकास के लिए किसानों को सहयोग कर रहा है।इस दिशा में बहुत से युवक,  महिलाएं एवं विद्यार्थी इन तकनीकों का लाभ उठाने हेतु संस्थान से परामर्श ले रहे हैं। कई उद्यमियों ने अपना व्यवसाय स्थापित करने में अभूतपूर्व सफलता भी प्राप्त की है।

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