Fasal Krati

आलीशान मकान और तरक्की वाले इस गांव में 730 किसानों में से 638 के पास उच्च शिक्षा की डिग्री

Last Updated: July 18, 2019 (07:01 IST)

चंदौली, उत्तर प्रदेश के खुरुहझा गांव में शानदार इमारतें, गेहूं-धान की दोगुनी पैदावार, हर घर में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर... यहां की समृद्धि को बयां करने के लिए काफी हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त यहां के किसान नौकरी को दो टूक नकार अपनी खेती-बाड़ी में खुशहाल हैं। 730 किसानों वाले इस गांव में 638 स्नातक, परास्नातक हैं, जो अब कृषि विज्ञान में भी ग्रेजुएशन कर रहे हैं। यह एक उदाहरण है, जहां शिक्षा को तो तवच्जो भरपूर है, लेकिन करियर और खुशहाली की राह खेतों से होकर ही गुजरती है।

कुछ युवा बाकायदा कृषि विज्ञान स्नातक कर रहे हैं तो किसानों का समूह अब एक-दूसरे संग मंथन कर पारंपरिक-उन्नत खेती में अपना कौशल बढ़ाने में जुटा हुआ है। मसलन, कम से कम पानी सिंचाई में लगे, इसके लिए क्या किया जाए, क्यों न टपक विधि और स्प्रिंकलर को आजमाया जाए...। इस तरह उन्नत कृषि के विविध उपाय इस गांव में देखने को मिल जाएंगे। कम लागत में अधिक उत्पादन मिले, इसके लिए जो भी जुगत होती है यहां के किसान वह सब अपनाते हैं। जिले में पैदावार आठ से दस कुंतल प्रति बीघा के सापेक्ष 16 से 20 कुंतल के दोगुने आंकड़े को छू चुकी है।

शिक्षित किसानों ने रासायनिक खाद से दूरी बनाई तो जैविक से नाता जोड़ लिया है। इसके लिए फसलों के अवशेष संग खेतों में जोताई, जैविक खाद बनाने में प्रयुक्त घास संग खेत की जोताई, गोबर का खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। पैदावार के साथ फसलों की गुणवत्ता भी बढ़ रही है। कम लागत में अधिक उत्पादन की होड़ में जुटे खुरुहझा के किसान आदर्श समय सीमा का बखूबी पालन करते हैं। यहां अगैती की खेती करने का चलन जैसा है। मसलन जब अन्य जगहों पर किसान धान की नर्सरी लगा रहे होते हैं तो इस गांव के किसान उसकी रोपाई में जुटे होते हैं।

इसी गांव के दयाशंकर सिंह, ओमप्रकाश सिंह एलएलबी डिग्रीधारी हैं। पढ़ाई के बाद प्रेक्टिस से अच्छा किसानी को माना और डट गए खेत-खलिहान में। वह बताते हैं कि प्रति वर्ष धान और गेहूं मिलाकर करीब 20 लाख का अनाज बेचते हैं। राजवंश सिंह भी ग्रेजुएट हैं। वह खुद भी प्रति वर्ष 14 लाख का अनाज बेचकर अच्छी आय हासिल कर रहे हैं। किसान जयप्रकाश सिंह व गुड्डू सिंह ने बताया कि पैदावार बढ़ाने के लिए उनके गांव के लगभग सभी किसान समय से पहले अगैती के लिए बोआई और रोपाई कर देते हैं, इसके अलावा जैविक खादों का प्रयोग किया जाता है। पराली को यहां के किसान खेतों में जलाते नहीं हैं बल्कि उसे ट्रैक्टर से जोताई कर मिट्टी के नीचे पलट देते हैं ।

यहां किसानी घाटे का सौदा नहीं...

ग्राम प्रधान तारा सिंह कहते हैं, हमारे गांव के किसान परिवारों ने पढ़ाई में हमेशा खुद को आगे रखा, लेकिन हमें पता था कि खुशहाली के लिए खेती से बढ़िया दूसरा कोई रास्ता नहीं है। हमारा गांव उदाहरण है, ऐसा कोई परिवार नहीं जिसकी गृहस्थी मुश्किल में हो। किसानी के तौर- तरीके में लगातार उन्नति कर हम पैदावार को दोगुने पर पहुंचा चुके हैं। साभार- दै. जा.


MORE ON THIS SECTION


IFFCO named No.1 company by magazine Fortune India 500

पत्रिका फॉर्च्यून इंडिया 500 ने इफको को नं-1 कंपनी सिद्ध किया

प्रसिद्ध पत्रिका फॉर्च्यून इंडिया 500 ने एक बार फिर इफको को देश में उर्वरक और कृषि रसायन उद्योग में शीर्ष कंपनी के रूप में स्थान दिया है। इसके अलावा, पूरे विश्व के 500 कंपनियों के बीच इफको 68 वें स्था…

100% result of trainees of Krishi Vigyan Kendra in skill development examination

कौशल विकास की परीक्षा में कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रशिक्षार्थियों का परिणाम शत् प्रतिशत

कृषि विज्ञान केन्द्र, रीवा द्वारा भारत सरकार की कौशल विकास योजनार्न्तगत आयोजित कौशल विकास प्रशिक्षण केचुआ खाद उत्पादन एवं संरक्षित कृषि (उद्यानिकी) में सम्मिलित प्रशिक्षणार्थियों को केन्द्र सरकार के क…

Engineer left for 10 million package jobs on unmatched mission

10 लाख पैकेज की नौकरी छोड़ बेमिसाल मिशन पर निकला इंजीनियर

इंजीनियर मांजूनाथ का जज्‍बा इंसानियत के प्रति नया नजरिया देती है। दोस्‍त की मां को न बचा पाने की पीडा़ मिली तो 10 लाख पैकेज की नौकरी छोड़ अंगदान का अलख जगाने साइकिल पर निकल पड़े। डबवाली, [डीडी गोयल]। …

The bone will be attached to the egg peel

अंडे के छिलके से जुड़ेगी हड्डी

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आइआइटी) हैदराबाद और डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआइटी) जालंधर के शोधकर्ताओं ने अंडे के छिलके से हड्डी का इंप्लांट बनाने की प्रक्रिया विकसित की …

Horizontal Ad large