धान उत्पादन की उन्नत तकनीकी

प्रायः धान की रोपाई के उपयुक्त समय पर श्रमिकों की समुचित उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। इसके साथ ही ऊँचे दर पर श्रमिक मिलने पर धान की खेती की लागत बढ़ जाती है। इस परिस्थिति में किसान लेव किये गये खेत में धान की छिटकवा विधि से सीधी बुआई करने लगे हैं। परन्तु देखा जा रहा है कि धान की इस तरह छिटकवा विधि से बुआई करने पर खेत में जमे हुए धान के पौधों में समानता नहीं होती साथ ही पौधों की कम संख्या जमती है, जिससे धान की अपेक्षित उपज प्राप्त नहीं हो पाती। ये समस्याएं लेव किये गये खेत में धान की ड्रम सीडर से सीधे बुआई करके दूर की जा सकती है। धान की ड्रम सीडर से सीधी बुआई करते समय खेत के समतलीकरण, मिट्टी की सेटिंग एवं खेत में जल स्तर पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

बोने का समय

ड्रम सीडर द्वारा अंकुरित धान की सीधी बुआई मानसून प्रारम्भ होने के एक सप्ताह पूर्व ही अर्थात जून के प्रथम सप्ताह तक पूरी कर लेनी चाहिए जिससे मानसून प्रारम्भ होने से पहले ही धान अच्छी तरह अंकुरित होकर खेत में स्थापित हो जाय क्योंकि एक बार मानसून प्रारम्भ हो जाने पर खेत में लगातार आवश्यकता से अधिक जल-जमाव होने पर धान का समुचित जमाव नहीं हो पाता।

धान के लिए खेत की तैयारी

गर्मी में समय मिलने पर खेत की एक बार अच्छी तरह से जुताई करले तथा गोबर अथवा कम्पोस्ट खाद 20 से 25 गाड़ी प्रति हैक्टेयर खेतो में डाल लें। इससे खेतो की उर्वरा शक्ति बरक़रार रहती है ।अगर खेतों में सन की हरी खाद की फसल लगाई गई हो तो उन खेतों में रोपा लगाने के 15 दिन पहले सन की फसल को जुताई ( 6 inch. की गहराई तक) कर ले और इसे मिट्टी में सड़ने के लिये छोड़ दें, क्योंकि हरी खाद द्वारा स्थाई रूप से मिट्टी की उर्वराशक्ति को बढ़ा सकते है। रोपा लगाने से पहले खेत की अच्छी तरह से मचाई कर लें, पाटा चलाने के पहले P.S.B कल्चर 500 gm मात्रा को 100 Kg गोबर की भुरभुरी खाद में अच्छी तरह मिलाकर प्रति हैक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें तथा नत्रजन की आधी मात्रा, स्फुर एवं पोटाश की पूरी मात्रा छिड़क कर मिट्टी में मिला दें।

खेत का समतलीकरण एवं जल निकास की व्यवस्था

खेत में लेव लगाते समय पाटा से खेत का समतलीकरण अच्छी तरह करें क्योंकि ऊँचा-नीचा खेत होने पर धान के बीज का जमाव एक समान नहीं हो पाता। खेत से जल निकास की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर लें क्योंकि धान जम जाने के बाद भी अधिक वर्षा होने पर वर्षा जल का पौधों के ऊपर तक जमाव अधिक समय तक होने पर पौधों के मरने की संभावना हो जाती है।

खेत में जल स्तर

ड्रम सीडर द्वारा धान की बुवाई के समय खेत में 2-2.5 इंच से अधिक जल स्तर न हो, इतना जल हो जिससे ड्रम सीडर आसानी से खेत में चल सके। जल स्तर अधिक होने पर खेत की मिट्टी तक ड्रम सीडर द्वारा बने हुए कुंड में बीज पहुँच नहीं पाता, बीज जल में ही रह जाता है और ड्रम सीडर द्वारा कतार में बनाये गये कुंड में बुवाई नहीं हो पाती।

लेव लगाने के बाद ड्रम सीडर से बोने का समय

शोध परीक्षण में पाया गया है कि लेव लगाने के 5-6 घंटे के अन्दर ही ड्रम सीडर द्वारा धान की सीधी बुआई कर देनी चाहिए। इससे अधिक विलम्ब होने पर धान की खेत की मिट्टी कड़ी होने लगती है और धान के पौधों की प्रारम्भिक बढ़वार धीमी होने के कारण उपज में गिरावट होने लगती है।

बीज दर

ड्रम सीडर द्वारा सीधी बुआई करने के लिए 50-55 किग्रा० बीज प्रति हेक्टेअर की आवश्यकता होती है।

प्रजातियों का चुनाव

  1. पूसा – 1460
  2. डब्लू.जी.एल. – 32100
  3. पूसा सुगंध – 3,
  4. पूसा सुगंध – 4
  5. एम.टी.यू. – 1010
  6. आई.आर. – 64 ,
  7. आई.आर. – 36
  8. धान: डीआरआर धान 310
  9. धान: डीआरआर धान 45

उर्वरकों का संतुलित प्रयोग एवं विधि

उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करें। मृदा परीक्षण न हो पाने की स्थिति में उर्वरकों का प्रयोग निम्न प्रकार किया जाय। शीघ्र पकने वाली प्रजातियों के लिए नत्रजन 80-90 किग्रा० प्रति हेक्टेअर, फास्फोरस 30-40 किग्रा० प्रति हेक्टेअर, पोटाश 30-40 किग्रा०प्रति हेक्टेअर की दर से तत्व के रूप में दें। मध्यम अवधि की अधिक उपज देने वाली प्रजातियों के लिए नत्रजन 100-120 किग्रा० प्रति हेक्टेअर, फास्फोरस 50-60 किग्रा० प्रति हेक्टेअर, पोटाश 50-60 किग्रा प्रति हेक्टेअर की दर से तत्व के रूप में है। नत्रजन की एक चौथाई भाग एवं फास्फोरस एवं पोटाश की पूर्ण मात्रा बुआई के समय, तथा शेष नत्रजन का दो चौथाई भाग कल्ले निकलते समय तथा शेष एक चौथाई भाग बाली बनने की प्रारम्भिक अवस्था पर प्रयोग करें।

खरपतवार प्रबन्धन

ड्रम सीडर द्वारा धान की सीधी बुआई की दशा में खर-पतवार प्रबन्धन पर विशेष ध्यान देना होगा। कतार में बुआर्इ होने के कारण श्रमिकों द्वारा खुर्पी से निराई सुगमता से हो सकती है। प्रथम निराई बुआई के 20 दिन बाद, दूसरी निराई 40 दिन के बाद करें।

धान की ड्रम सीडर से बुआई करने से लाभ

ड्रम सीडर से बुआई करने पर जल और श्रमिक पर होने वाले व्यय में बचत होती है।सीधी बुआई करने पर धान के फसल की अवधि 7-10 दिन कम हो जाती है जिससे रबी में गेहूँ की बुआई समय से हो सकती है।कम वर्षा या सूखे की स्थिति से नर्सरी जब बोने की स्थिति न बन पाये तो ड्रम सीडर से किसान भाई सीधे बुआई करके धान की फसल लेने का प्रयास कर सकते हैं।ड्रम सीडर से धान की बुआई कतार में होने के कारण खर-पतवार नियन्त्रण में आसानी होती है।

धान की रोपाई

धान की रोपाई पर ध्यान देने योग्य बाते

  • धान की रोपाई के लिए पौध उखाड़ने से 1 दिन पहले नर्सरी के खेत में पानी चला दे ताकि जमीं पर नमी बनी रहे और पौध उखाड़ते समय ध्यान दे की पौधों कि जड़ों को धोते समय नुकसान न होने दे तथा पौधों को काफी निचे से पकड़कर उखाड़ें।
  • धान की रोपाई में पौधे की उम्र सामान्यत : 25 – 30 दिन पुराना हो तथा पौधे में 5–6 पत्तियां निकल जाए तो यह रोपाई के सही होता है, और यदि पौधे की उम्र ज्यादा होगी तो पौधे में कल्ले कम फूटते है जिससे उपज में कमी आती है।
  • रोपाई करने से पहले खेत को अच्छी तरह से समतल कर के मेंड़ बना लें।
  • धान की फसल को खाद्यान फसल में सबसे अधिक पानी की आवस्य्क्ता होती है, धन को रोपाई के एक सप्ताह बाद कल्ले बनते समय, बाल निकलते समय, फूल बनते समय, और दाना बनते समय खेतो में पानी अति आवश्यक है।
  • यदि वर्षा की कमी के कारण फसलों में पानी की कमी दिखाई दे, तो सिंचाई अवश्य करें। खेत में पानी रहने से फास्फोरस, मैगनीज और लोहा तत्वों की उपलब्धता बड़ जाती है, साथ ही हमरे खेत में जो विभिन्न प्रकार के खरपतवार होते है वो भी अधिक पानी की अवस्था में नहीं उग पाते है।

कैलाश चन्द यादव1, डॉ. हीरा लाल यादव2
1वरिष्ठ अनुसन्धान अध्येता, राजस्थान कृषि अनुसन्धान संस्थान,
दुर्गापुरा (जयपुर)2सहायक कृषि अधिकारी, नीमराना, अलवर

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