पपीते की खेती से कमाइए प्रति हेक्टेयर 10 लाख से अधिक...

खेती से कमाई कराने के मामले में पपीता आपके लिए एक बेहतर विकल्‍प हो सकता है। हाल के दौर में मार्केट में आई हाईब्रिड किस्‍मों के चलते पपीते से कमाई करना पहले से ज्‍यादा आसान हुआ है। आप एक हेक्‍टेयर पपीते की खेती से एक सीजन में करीब 10 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। पपीते की खासियत यह है कि इसकी फसल जल्‍दी तैयार होती है और साल भर मे फसल देने लगती है। एक बार पपीता लगाकर आप 3 साल तक उपज भी ले सकते हैं। इसके चलते एक बार पेड़ तैयार होने पर लागत भी कम होती जाती है। आइए जानते हैं पपीते की खेती के बारे में और इसके जरिए कैसे कमाई कर सकते हैं।  
 
भारत में कहीं भी कर सकते हैं पपीते की खेती  

पपीते की खेती के लिहाज से भारत एक उपयुक्‍त देश है। इसे अधिकतम 38 से 44 डिग्री सेल्सियस तक तापमान में उगाया जा सकता है। ऐसा तापामान कमोबेश पूरे भारत में पाया जाता है। पतीते की खेती के लिए न्‍यूनतम तापमान 5 डिग्री होना चाहिए। मतलब आप इसे पहाड़ों से सटे इलाकों में भी उगा सकते हैं। इस लिहाज से आप भारत के किसी भी कोने में रहते हैं तो पपीते की खेती कर सकते हैं। 

पपीपे की किस्में  

पपीते की कई देसी और कई विदेशी दोनों तरह की हाईब्रिड किस्‍में आपको मार्केट में मिल सकती हैं। पूसा की ओर से पपीते की कई किस्‍मे विकसित की गई हैं।  इन डेवलप किस्‍मों में पूसा मेजस्‍टी एवं पूसा जाइंट, वाशिंगटन, सोलो, कोयम्‍बटूर, हनीड्यू, कुंर्ग‍हनीड्यू, पूसा ड्वार्फ, पूसा डेलीसियस, सिलोन, पूसा नन्‍हा आदि शामिल हैं। विदेशी किस्‍मों में ताईवनी red lady और कुछ इस्राइली किस्‍में भी अच्‍छी पैदावार देती हैं। 

एक हेक्टेयर में कितनी होती है पैदावार   

इलाहाबाद के रामपुर गांव में पपीते की खेती करने वाले किसान हर्षेश ओझा के मुताबिक, पपीते का एक स्‍वस्‍थ पेड़ आपको एक सीजन में करीब 40 किलो तक फल देता है। हर्षेश के मुताबिक, आप दो पड़ों के बीच करीब 6 फिट का गैप रख सकते हैं और इस हिसाब से आप एक हेक्‍टेयर में करीब 2250 पेड़ तैयार कर सकते हैं। इस हिसाब से आप एक सीजन में एक हेक्‍टेयर पपीते की फसल से 900 क्विंटल पपीता पैदा कर सकते हैं।  

ये सावधानियां हैं जरूरी  

हर्षेश के मुताबिक, पपीते का पौधा काफी सेंसिटिव हो‍ता है, इसलिए इसके आसपास तापमान का खास खयाल रखें। गर्मी में चलने वाली लू और सर्दी का पाला दोनों पपीते को नुकसान पहुंचाते हैं। बचने के लिए खेत के उत्‍तर , पश्चिम में हवा रोकने का इंतजाम जरूर करें। पाला पड़ने की दशा में खेत में धुंआ करके सिंचाई करने की देसी तकनीक का यूज कर सकते हैं। ज्‍यादा पानी भी पपीते के लिए नुकसान दायक होता है। इसलिए खेत में पानी की निकाली का इंतजाम जरूर करें। पानी लगने की दशा में कॉलर रॉट बिमारी लगने की सम्‍भावना रहती है। 

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