उत्तर प्रदेश के किसानों की सेवा में इफको

उत्तर प्रदेश के किसानों की सेवा में इफको

उत्तर प्रदेश के किसानों की सेवा में इफको

उत्तर प्रदेश 241.7 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में अवस्थित है। शुद्ध कृषिगत क्षेत्र 165.6 लाख हैक्टेयर है। यह देश का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक राज्य है। यहाँ पर गंगा, यमुना व उनकी सहायक नदियों, नहरों व अन्य स्रोतों द्वारा लगभग 140 लाख हैक्टेयर सिंचित क्षेत्र है। उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक उर्वरक उपयोग करने वाला प्रदेश है। इफको यहाँ शीर्ष आपूर्तिकर्ता की भूमिका में है। अतः इफको द्वारा उत्तर प्रदेश में प्राथमिकता के आधार पर उर्वरकों की आपूर्ति की जाती है। उल्लेखनीय है कि इफको के दो उर्वरक संयंत्र भी इसी प्रदेश में स्थित हैं। प्रदेश के कुल उर्वरक वितरण में इफको की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत रही है। वर्ष 2015-16 में प्रदेश में यूरिया, एनपीके व डीएपी की कुल उर्वरक आपूर्ति 86.70 लाख टन थी, जिसमें इफको की हिस्सेदारी 38.13 लाख टन (44 प्रतिशत) रही है। इफको द्वारा प्रदेश में यूरिया, डीएपी, एनपीके 12:32:16, एनपीके 10:26:26, एनपीएस 20:20:0:13 व जिंकेटेड एनपीके की आपूर्ति की जाती है। विभिन्न पोषक तत्वों की कमी को दूर करने एवं उर्वरकों की क्षमता वृद्धि हेतु इफको ने जल-विलेय उर्वरक यथा 17:44 (यूरिया: फास्फेट), जल-विलेय एनपीके 18:18:18 एवं पोटेशियम सल्फेट की आपूर्ति प्रारम्भ की है। विभिन्न क्षेत्रों में मृदा परीक्षण परिणाम से ज्ञात हुआ है कि प्रदेश में जिंक, सल्फर व बोरॉन की भी कमी बड़े पैमाने पर पायी जा रही है। अतः इन पोषक तत्वों की कमी को दूर कर कृषि उत्पादन वृद्धि हेतु इफको द्वारा मोनो जिंक सल्फेट, बेन्टोनाइट सल्फर व बोरॉन की आपूर्ति की जा रही है।

समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन हेतु इफको ने पोषक तत्व संवर्द्धित कम्पोस्ट, हरी खाद आदि के प्रयोग हेतु विशेष बल दिया है। इफको द्वारा कोरडेट, फूलपुर से उत्पादित जैव उर्वरक एजोटोबैक्टर, राइजोबियम, एसीटोबैक्टर, फॉस्फोरस घोलक बैक्टीरिया, एनपीके बैक्टीरिया, पोटाश व जिंक घोलक बैक्टीरिया आदि का वितरण तरल रुप में कृषकों को किया जा रहा है, जिससे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व पोटाश की उपलब्धता में वृद्धि, इन जैव उर्वरकों में मौजूद सूक्ष्म जीवों द्वारा हो जाती है। जिससे कृषि उपज में सार्थक वृद्धि होती है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2016-17 में 4.36 लाख लीटर तरल जैव उर्वरक की आपूर्ति की योजना है।

  1. इफको कृषक सेवा केन्द्रों की कृषि विकास में भूमिका - प्रदेश में इफको द्वारा 66 कृषक सेवा केन्द्रों की स्थापना की गयी है, जिनसे उर्वरकों के साथ-साथ जैव उर्वरक, जल-विलेय उर्वरक व इफको-एमसी से उत्पादित कृषि रसायनों की बिक्री कृषकों को की जा रही है। इन किसान सेवा केन्द्रों पर कृषि निवेशों की पूर्ति के अलावा इनके कारगर उपयोग के बारे में जानकारी भी दी जाती है। इन किसान सेवा केन्द्रों द्वारा औसत रुप से प्रति केन्द्र 4130 टन उर्वरकों की वार्षिक बिक्री की जा रही है। कृषक सेवा केन्द्रों द्वारा गत वर्ष पूरे प्रदेश में लगभग 3 लाख टन उर्वरकों की बिक्री हुई है।
  2. मृदा जीर्णोद्धार कार्यक्रम - प्रदेश में सघन कृषि पद्धतियों को अपनाने से कृषि उत्पादन में आशातीत वृद्धि हुई है। परिणामस्वरुप फसलों द्वारा आवश्यक पोषक तत्वों का दोहन भारी मात्रा में मृदा से किया गया है। परिणामस्वरुप मृदा में जीवांश कार्बन, फॉस्फोरस, पोटाश, जिंक, सल्फर, बोरॉन, लोहा व कैल्शियम की कमी हो गयी है। साथ ही मृदा के भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणों में भी ह्रास हुआ है। मृदा को सतत् कृषि के उपयुक्त तथा उत्पादित खाद्यान्न की गुणवत्ता बनाये रखने हेतु इफको द्वारा पूरे प्रदेश में हरी खाद व दलहनी फसलों के क्षेत्र को बढ़ाने हेतु कार्यक्रम चलाया जा रहा है। हरी खाद की फसल की मिट्टी में पलटाई कर देने से मिट्टी में जीवांश कार्बन व उपलब्ध नाइट्रोजन की मात्रा मे वृद्धि के साथ ही अन्य सभी पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है तथा मिट्टी के भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणों में उल्लेखनीय सुधार होता है, जिससे उत्पादन, उत्पाद की गुणवत्ता तथा किसानों की आय में वृद्धि होती है।
  3. ग्राम अंगीकरण - इफको द्वारा प्रदेश के सभी जनपदों में 84 ग्राम सभाओं का अंगीकरण किया गया है, जिसे मॉडल गाँव के रुप में विकसित किया जायेगा, जिसमें कृषि विकास, सामाजिक विकास, मृदा जीर्णोद्धार हेतु बहुत से तकनीकी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे आधुनिक कृषि तकनीकी का विस्तार व नये उत्पादों के बारे में कृषकों का ज्ञानवर्धन हो रहा है। परिणामस्वरुप कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ ही उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।
  4. सहकारिता विकास - प्रदेश के विभिन्न जनपदों में गोष्ठियाँ एवं प्रशिक्षण आयोजित कर सहकारी कर्मियों के तकनीकी कृषि ज्ञान में वृद्धि की जा रही है। प्रदेश के सहकारिता विभाग के जनपदीय एवं तहसील स्तरीय अधिकारियों का एफ.एम.डी.आई., गुड़गाँव में भी प्रशिक्षण कराकर उनका ज्ञानवर्धन किया गया है। सदस्य समितियों को इफको द्वारा 20 प्रतिशत लाभांश का भुगतान सतत् रुप से किया जा रहा है। समितियों के गोदामों में उर्वरक भण्डारण व उनके द्वारा इफको उर्वरकों का परिवहन किये जाने से समितियों की आय व व्यवसाय में वृद्धि हो रही है। वर्ष 2016-17 में प्रारंभिक सहकारी समितियों पर इफको उर्वरकों के भण्डारण की महत्वाकांक्षी योजना बनायी गयी है, जिससे समितियों के उर्वरक व्यवसाय तथा आय में वृद्धि होगी।
  5. कृषि मेला व प्रदर्शनी - इफको द्वारा प्रदेश में जनपद, मण्डल व प्रदेश स्तरीय मेला व प्रदर्शनियों में सक्रिय रुप से भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकी व नये उत्पादों का प्रदर्शन कर कृषकों का ज्ञान वर्धन किया जाता है। उल्लेखनीय है कि कई जनपदों व मण्डलों में उत्कृष्ट प्रदर्शनी हेतु इफको को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
  6. पर्यावरण संरक्षण - इफको द्वारा प्रदेश में एक लाख से ज्यादा नीम के पेड़ लगाये गये है, जिससे पर्यावरण में सुधार होगा। साथ ही नीम से उत्पादित नीमौरी इफको द्वारा 15 रुपए प्रति कि.ग्रा. की दर से कृषकों से क्रय किया जायेगा, जिससे कृषकों को अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त होगी। इफको द्वारा परिवर्धित आई.एफ.एफ.डी.सी. द्वारा प्रदेश में वृहद् क्षेत्र पर ”वेस्ट लैंड डेवलेपमेंट योजना“ मृदा सुधार, वृक्षारोपण व उन्नतशील बीज का उत्पादन व वितरण किया जा रहा हेै। जल-संचय की कई योजनाएं भी आई.एफ.एफ.डी.सी. द्वारा चलायी जा रही हैं।
  7. कृषक प्रशिक्षण - इफको द्वारा स्थापित ग्रामीण विकास न्यास, कोरडेट द्वारा कृषकों का वृहद रुप से प्रशिक्षण का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इन प्रशिक्षणों का मुख्य उद्देश्य कृषकों की कृषि संबंधित नूतन तकनीकी जानकारी में वृद्धि करना है। कृषकों के खेतों मे क्षेत्र प्रदर्शन आयोजित कर नवीनतम कृषि विधियों की जानकारियों से कृषकों को अवगत कराना भी कोरडेट का उद्देश्य है। कारडेट में स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला व इफको के मोबाइल सॉइल टेस्टिंग वैन (सचल मिट्टी परीक्षण यान) द्वारा कृषकों के खेतों से एकत्र किये गये 72000 नमूनों की जाँच कर सॉइल हेल्थ कार्ड कृषकों को उपलब्ध कराये गये हैं।
  8. विशेष परियोजनाएं - इफको ने समस्याग्रस्त क्षेत्रों में आर्थिक व व्यावहारिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल को मूर्तरुप देने के उद्देश्य से प्रदेश के उन्नाव, इटावा, कन्नौज व मुजफ्फरनगर जिलों में मृदा जीर्णोद्धार एवं उत्पादकता वृद्धि परियोजनानामक विशेष परियोजनाएं चलायी हैं, जिससे इन क्षेत्रों में फसल-उत्पादन व मृदा स्वास्थ्य व कृषकों की आय में आशातीत वृद्धि हुई हैं।
  9. प्रोन्नयन कार्यक्रम - इफको द्वारा नियमित रुप से किसान सभाओं, किसान के खेतों पर प्रदर्शन, किसान दिवस, वृहद् फसल विचार गोष्ठियाँ तथा प्रशिक्षण व भ्रमण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण व भ्रमण कार्यक्रमों में कृषकों को कृषि विश्वविद्यालयों/शोध संस्थानों का भ्रमण कराकर आधुनिक कृषि तकनीकी एवं ग्रामीण विकास की जानकारी उपलब्ध करायी जाती है, जिससे किसान समावेशी विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
  10. सिटी कम्पोस्ट के प्रयोग को बढ़ावा देने का प्रयास - इफको, उ.प्र. द्वारा प्रारंभिक रुप से सिटी कम्पोस्ट के प्रयोग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संर्वद्धन की पहल वर्ष 2016 से की गयी है। इफको का यह कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा सुझाई गयी सिटी कम्पोस्ट के उपयोग की योजना को साकार करने की पहल के रुप में एक अनूठा कार्यक्रम है। इफको द्वारा सिटी कम्पोस्ट का किसानों को निःशुल्क वितरण किया जा रहा है। यह कार्य प्रदेश के सभी जिलों में करने का प्रस्ताव है।
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