गेलार्डिया की उन्नत खेती

मानव जीवन में फूलों का महत्वपूर्ण स्थान हैं। फूलों की सुन्दरता मनुष्य को अपनी और आकर्षित करती हैं। प्राचीन एवं धार्मिक प्रवृति वाले देष भारत में फूल सभी धार्मिक रिती-रिवाज तथा त्यौहारो पर उपयोग लिया जाता हैं। मानव जीवन में फूल शुद्धता, सुन्दरता, प्रेम और धैर्य के प्रतीक माने जाते हैं तथा उगाने में आसान, कम समय में बाजार में बेचने हेतु फूलों का उपलब्ध होना, विभिन्न रंगों एवं रुपों एवं आकार की प्रजातियाँ उपलब्ध हैं। साल भर फूलों की माँग का होना, कम लागत में अधिक आय का होना, इसके फूलों के रस से उपचारित फलों में किसी प्रकार के कवक उत्पन्न नहीं होते हैं। भारत में फूलों की खेती की बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं ऐसे में किसान भाई अगर अन्य फसलों के साथ-साथ फूलों की खेती करें तो वर्ष भर अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। उत्तरी भारत में गेंदा, गुलदाउदी, गुलाब, जैसमीन तथा गैलार्डिया की सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है। जिनमें से गेंदा सभी पुष्पों से अधिक आमदनी देने वाला तथा सरल खेती की श्रेणी में आता है। मौसमी पुष्पों में गेलार्डिया एक महत्वपूर्ण पुष्प है। यह गर्मी, बरसात व सर्दी तीनों ही मौसम में आसानी से उगाया जा सकता है। फरवरी-मार्च में बुवाई करने पर फूल गर्मियों में, मई-जून में बुवाई करने पर बरसात में और सितम्बर-अक्टूबर में बुवाई करने पर सर्दियों में फूल आते हैं।

जलवायु एवं भूमि - गेलार्डिया की अच्छी उपज के लिए खुली धूप वाली जगह और उचित वायु संचार, गहरी मृदा, उपयुक्त जल- धारण क्षमता तथा 6.0-8.0 पीएच मान वाली भूमि में अच्छी पैदावार ली जा सकती है। 

जातियाँ एवं किस्में - इसकी दो मुख्य प्रजातियाँ हैं-

गेलार्डिया पिक्टा - इसमें बड़े आकार के पुष्प आते हैं।

गेलार्डिया लोरेन्जियाना - इसमें फूल पंखुड़ियों वाले, विखंडित कोरों व एक ही पुष्प में कई आकर्षक रंगो मंे डबल  पुष्प आते हैं। लोरेन्जियाना की प्रमुख किस्में-सनशाइन, स्ट्रॉन और गेटी डबल मिक्सड हैं। एक संकर किस्म टेट्रा फिस्टा हाल ही में विकसित की गई है। इसमें फूल डबल आकार में बड़े और पंखुड़ियाँ चमकीली लाल रंग की पीले किनारों वाली होती हैं। इसके अतिरिक्त इसमें बड़े सिंगल फूलों वाली ग्रेन्डीफ्लोरा आदि कुछ बहुवर्षीय किस्में भी हैं।

बीज की बुवाई एवं मात्रा - गेलार्डिया के पौधे देर से फूल देते हैं और बुवाई के तीन से चार माह पश्चात् फूल आने लगते हैं। आवश्यकतानुसार बीज नर्सरी की क्यारियों में, लकड़ी के खोखों में, गमलों में, मिट्टी के तसलों में एवं प्लास्टिक ट्रे में बोये जा सकते हैं। बीज बोने से पूर्व किसी फफूँदीनाशी दवा जैसे थाइरम या बाविस्टीन आदि से उपचारित कर बोयें। बुवाई के 4 से 6 सप्ताह बाद पौध खेत में रोपाई के लायक हो जाती है। एक हैक्टेयर की रोपाई के लिए 500 से 600 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

गेलार्डिया की पौध तैयार करना

  • गेलार्डिया की पौध तैयार करने के लिये उपयुक्त भूमि का चुनाव किया जाता है तथा क्यारी भूमि की सतह से 10-15 सेंमी. ऊपर उठी होनी चाहिए, जिससे वर्षा के पानी को आसानी से बाहर निकाला जा सके।
  • 150 वर्ग मीटर नर्सरी का क्षेत्रफल एक हैक्टेयर के लिए पर्याप्त माना जाता हैं। इसके लिये क्यारियाँ 3 मीटर लम्बी, एक मीटर चौड़ी तथा 10-15 सेंमी. जमीन से ऊपर बनानी चाहिएं।
  • उचित आकार की क्यारियाँ बनाने के बाद 30 किलोग्राम वर्मी-कम्पोस्ट या गोबर की खाद प्रति क्यारी के हिसाब से मिलायें।
  • क्यारियों में खाद को अच्छी तरह मिलाकर हल्की सिंचाई कर दें ताकि खरपतवारों का अंकुरण फसल से पहले हो जाये तथा उनका नियंत्रण आसानी से किया जा सके।
  • गेलार्डिया की फसल की पौध हमेशा खुले में तैयार करनी चाहिए ताकि पौधो को आवश्यकतानुसार प्रकाश एवं वायु उपलब्ध हो सके।
  • इसके बाद क्यारियों को कवकनाशी से उपचारित करें ताकि पौधों को कवक के प्रकोप से बचाया जा सके। कवकनाशी के लिये 2 ग्राम/लीटर पानी मे बाविस्टीन डाल कर छिड़काव करें।
  • इसके बाद बीज की बुवाई करें जिसमें पौधे से पौधे की दूरी 3 सेंमी. तथा लाइन से लाइन की दूरी 5 सेंमी. रखें। बीज की गहराई 2 सेंमी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
  • 5-7 दिन के बाद बीज का अंकुरण होना शुरु हो जाता है।
  • नर्सरी मे पौधों को कीटों से बचाने के लिए 2 मिलीलीटर डाइमिथोएट (रोगोर) या 5 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।
  • जब पौधा 7-10 सेंमी. की ऊँचाई का या 3-4 सप्ताह का या 4-5 पत्ती आने पर खेत के अन्दर स्थानान्तरण कर देना चाहिए।
  • नर्सरी से खेत मे पौध का स्थानान्तरण शाम के समय करना चाहिए ताकि पौधा आसानी से खेत में स्थापित हो जाये तथा स्थानान्तरण के तुरन्त बाद सिंचाई कर देनी चाहिए।

 

खेत की तैयारी - खेत की 3 से 4 जुताई करें और पाटा लगाकर खेत को समतल कर लें। अंतिम जुताई के समय 10-12 टन गोबर की खाद प्रति हैक्टेयर की दर से भूमि में डालनी चाहिए। सिंचाई के लिए सुविधानुसार खेत में क्यारियाँ बना लेनी चाहिएं।

पौध की रोपाई - गेलार्डिया के पौधों की रोपाई समतल क्यारियों में की जाती है। पौध की रोपाई 60 सेंमी. लाइन से लाइन एवं 45 सेंमी. पौधे से पौधे की दूरी रखकर करनी चाहिए।

सिंचाई एवं उर्वरक - गेलार्डिया में सही समय पर सिंचाई करने पर पुष्प खिलते रहते हैं। अतः भरपूर पुष्प लेने के लिए उर्वरकों का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। 200 किलोग्राम यूरिया, 400 किलोग्राम सुपर फॉस्फेट, 100 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश उर्वरक प्रति हैक्टेयर की दर से डालें। गोबर की खाद, सुपर फॉस्फेट व म्यूरेट ऑफ पोटाश की सम्पूर्ण मात्रा व यूरिया की आधी मात्रा रोपाई के पूर्व डालें। यूरिया की शेष आधी मात्रा 45 दिन पश्चात् खड़ी फसल में दें। यूरिया देने के बाद सिंचाई अवश्य करें।

निराई-गुड़ाई - इस फसल में दो तीन बार गुड़ाई कर खरपतवारों को नष्ट करें। गुड़ाई करते समय पौधों के चारों ओर मिट्टी चढ़ाएं। समय-समय पर निराई-गुड़ाई कर खेत को खरपतवारों से मुक्त रखें।

व्याधि प्रबंध

जड़ गलन - इस रोग से पौधों की जड़ें सड़ जाती हैं। नियंत्रण हेतु कैप्टान 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से भूमि को उपचारित करें।

फूलों की तुड़ाई एवं उपज - पौधों की रोपाई से 3 से 4 महीने बाद पुष्प खिलने शुरु होते हैं। पुष्पों की तुड़ाई समय पर करते रहना चाहिए। हर चौथे रोज पुष्पों की तुड़ाई करें जिससे आगे पुष्प निरंतर बनते रहें। पुष्प चुनते समय ध्यान रहे कि सभी पूर्ण विकसित पुष्प तथा डोडे पौधों पर छूटने न पायें। प्रति हैक्टेयर 100 से 150 क्विंटल पुष्पोत्पादन प्राप्त होगा।

सावधानियाँ

  • गेलार्डिया की फसल को पौधशाला में रोग व कीटों से बचाव का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • पौधशाला हमेशा एक उचित स्थान पर ही बनानी चाहिए, क्योंकि पौधा जितना स्वस्थ होगा उत्पादन उतना ही अधिक होगा।

मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिये बुवाई के समय में थोडा परिवर्तन कर देना चाहिए।

 

अशोक चौधरी - आशुतोष मिश्रा - कमल नागर - रामराज मीना*
उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान

कृषि विज्ञान केन्द्र, झालावाड़, राजस्थान

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